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रेवाड़ी में 'आग' से खेल रहे कोचिंग सेंटर संचालक, हजारों बच्चों की जान जाखिम में, प्रशासन को 'हादसे' का इंतजार

आगजनी की घटना से खुली फायर सेफ्टी प्रबंधों की पोल, रेवाड़ी शहर के किसी भी कोचिंग सेंटर में नहीं की गई है व्यवस्था, नेशनल बिडिंग एक्ट की नहीं हो रही कोई पालना।

रेवाड़ी में आग से खेल रहे कोचिंग सेंटर संचालक, हजारों बच्चों की जान जाखिम में, प्रशासन को हादसे का इंतजार
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रेवाड़ी में ब्रास मार्केट में लाइब्रेरी में लगी आग। (फाइल फोटो)

नरेन्द्र वत्स : रेवाड़ी

गत शुक्रवार को रेवाड़ी की ब्रास मार्केट में एक लाइब्रेरी में लगी आग के बाद फायर ब्रिगेड और आसपास के लोगों के प्रयासों से इसमें फंसे बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया। इस घटना ने कोचिंग सेंटरों व शहर की दूसरी बिल्डिंगों में आगजनी से बचाव के प्रबंधों की पोल खोलकर रख दी। आग से बचाव के कारगर प्रबंध नहीं होने के कारण भविष्य में बड़ा हादसा भी हो सकता है। शहर में चल रहे कोचिंग सेंटर के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी तक नहीं है। नेशनल बिल्डिंग एक्ट की इन लोगों को कोई परवाह नहीं है। इसके बावजूद ऐसी बिल्डिंग में आग से सुरक्षा के इंतजाम कराने में फायर ब्रिगेड फेल साबित हो रहा है।

ब्रास मार्केट कई वर्षों से कोचिंग सेंटरों का हब बना हुआ है। छोटे-बेड़े दर्जनों कोचिंग सेंटर इस मार्केट में चल रहे हैं। बहुमंजिला बिल्डिंगों में पांच से सात तक सेंटर चल रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से इनके पास कोई अनुमति नहीं है। युवाओं को उज्जवल भविष्य के सपनों और विभिन्न सरकारी नौकरियों के लिए सलेक्शन की गारंटी के साथ अभिभावकों की जेबों पर डाका डाल रहे कोचिंग सेंटरों में बच्चों को आगजनी से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए हुए। कई कोचिंग सेंटरों में तो आगजनी की घटना होने के बाद निकलने के लिए वैकल्पिक या इमरजेंसी गेट तक नहीं हैं। लगभग सभी कोचिंग सेंटर बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं।

जिन बिल्डिंगों को फायर एनओसी दी जाती है, उन्हें बिल्डिंगों के साइज और हाइट के हिसाब से आग से सुरक्षा के इंतजाम करने होते हैं। अधिकांश बिल्डिंगों में आग से सुरक्षा के नाम पर फायर एक्सटिंग्यूशर ही लगे हुए हैं। इनके समय से रिफिल कराने की कोई गारंटी नहीं होती। न ही बिल्डिंगों में रहने वाले लोगों को इमरजेंसी में इन्हें चलाने की कोई ट्रेनिंग दी जाती है। फायर बिग्रड के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बहुमंजिला इमारतों में तो पाइप लाइन और अंडरग्राउंड वाटर टैंकों से आग बुझाने की ब्यवस्था करना जरूरी होता है। ब्रास मार्केट की बिल्डिंगों में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की हुई। इमरजेंसी गेट नहीं होने के कारण इन बिल्डिंगों से बच्चों को सुरक्षित आसान निकालना मुश्किल साबित हो सकता है। यही हाल शहर के दूसरे एरिया में चल रहे कोचिंग सेंटरों का भी है। किसी भी कोचिंग सेंटर संचालक के पास फायर एनओसी नहीं है।

तीन साल पहले भी उठा था मामला

गुजरात के सूरत में तक्षशिला कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर वर्ष 2019 मंे लगी भीषण आग में 19 छात्रों की मौत के बाद जागरूक नागरिक प्रकाश खरखड़ा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि रेवाड़ी और धारूहेड़ा में कई ऐसी बिल्डिंग मौजूद हैं, जहां फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। आयोग की ओर से इसे जन सुरक्षा का मामला मानते हुए पत्र को रेवाड़ी डीसी के पास भेज दिया था। डीसी की ओर से इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए। इस समय ब्रास मार्केट में कई ऑफिस, होटल व प्राइवेट संस्थान चल रहे हैं। इनमें फायर सेफ्टी को लेकर कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।

रामभरोसे मल्टी स्टोरी बिल्डिंग

शहर में बड़ी संख्या में बहुमंजिला इमारतें बनी हुई हैं। इन इमारतों में भी फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। अधिकांश बिल्डिंगों को फायर ब्रिगेड की ओर से एनओसी भी मिली हुई है। एनओसी के बावजूद इन बिल्डिंगों में नेशनल बिल्डंग एक्ट की कोई पालना नहीं हो रही। एक बार लगाने के बाद अग्निशमक यंत्र धूल फांकने लगते हैं। उनकी एक्सपायरी डेट की ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता। आपाताकालीन स्थिति में यह यंत्र बेकार साबित होते हैं। आगजनी की घटनाओं के समय इनसे तत्काल पर आग पर काबू पाने की उम्मीद नहीं की जा सकती।

सरकारी दफतरों में भी बुरा हाल

जिला सचिवालय से लेकर अन्य स्थानों पर सरकारी दफ्तरों में फायर एक्सटिंग्यूशर तो लगे हुई हैं, लेकिन अधिकांश की एक्सपाइरी डेट खत्म हो चुकी है। जिला सचिवालय में लगे एक्सटिंग्यूशर पर लगी पर्चियों की डेट चेंज की गई है, जबकि इन्हें अभी तक रिफिल नहीं कराया गया है। डीटीपी कार्यालय में लगे फायर एक्सटिंग्यूशर जंग खा रहे हैं। यह कब लगे थे, इसकी जानकारी शायद अधिकारियों को भी नहीं है। इन एक्सटिंग्यूशर से छोटी आग की घटनाओं पर काबू पाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

कोचिंग सेंटरों का सर्वे शुरू

शहर में बड़ी संख्या में ऐसे कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इन कोचिंग सेंटरों का सर्वे शुरू करा दिया गया है। नियमों की पालना नहीं करने वाले कोचिंग सेंटरों और दूसरे बिल्डिंग मालिकों को नोटिस देने के बाद कार्रवाई की जाएगी। - एसके सांगवान, चीफ फायर ऑफिसर।

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