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हरियाणा में प्ले स्कूल चलाने के लिए नई नियम लागू, संचालकों ने जताया विरोध, जानिये क्या है शर्त

हरियाणा में प्राइवेट प्ले वे स्कूल चलाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। जिसको लेकर राज्य सरकार व प्राइवेट स्कूलों के बीच तलवारें खिंच गई हैं।

हरियाणा में प्ले स्कूल चलाने के लिए नई नियम लागू, संचालकों ने जताया विरोध, जानिये क्या है शर्त
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प्ले स्कूल

हरिभूमि न्यूज. अंबाला

हरियाणा में प्राइवेट प्ले वे स्कूल चलाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। जिसको लेकर राज्य सरकार व प्राइवेट स्कूलों के बीच तलवारें खिंच गई हैं। सरकार की ओर से अब प्राइवेट प्ले स्कूलों के लिए 1000 वर्ग गज की शर्त रखी है। यानि की अगर कोई व्यक्ति नया प्ले वे स्कूल खोलना चाहता है तो उसका भवन 1000 वर्ग गज में होना चाहिए।

इस मुद्दे पर शनिवार को अंबाला के प्ले-स्कूल्स की मीटिंग हुई जिसकी अध्यक्षता निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व फेडरेशन ऑफ़ प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन डॉ. कुलभूषण शर्मा व फेडरेशन के जिला अध्यक्ष आशुतोष गौड़ ने की। इसका मुख्य उद्देश्य कोरोना काल के दौरान बच्चों की शिक्षा को सुचारु रूप से कैसे रखा जाए तथा बच्चों के लर्निंग लॉस को किस प्रकार कम किया जाए इस पर भी गंभीरता से विचार किया गया

सरकार की नई शर्त से स्कूल संचालक नाराज

सरकार द्वारा प्ले-स्कूलों के लिए लगभग 1000 वर्ग गज की आवश्यकता वाले मुद्दे पर सभी ने नाराजगी जताई। सभी ने सरकार ने यह आग्रह करने पर बल दिया की जो भी प्ले-स्कूल्स अभी सुचारु रूप से कार्य कर रहे हैं उनको छूट प्रदान की जानी चाहिए। मीटिंग के दौरान शर्मा ने कहा गया कि प्राइमरी कक्षा तक के स्कूल्स के लिए अगर 300 गज क्षेत्र का प्रावधान है तो प्ले-स्कूलों के लिए 1000 वर्ग क्षेत्र का नियम सरासर निराधार है। उन्होंने सरकार से मांग की के प्ले स्कूलों की भूमि का मापदंड प्राइमरी स्कूलों के लिए तय की भूमि के अनुपात में होना चाहिए और नियम बनने से पूर्व चलने वाले स्कूलों को अधिकतम राहत भूमि के मानदंडों में मिलनी चाहिए।

नए नियम प्री स्कूलों के गले की फांस बने

सरकार ने यह नियम निर्धारित करते समय न तो प्रदेश में चलने वाले स्कूलों को विश्वास में लिया न ही वे इस समय कितनी जगह में चल रहे हैं इस बात को ध्यान में रखा। ऐसे में ये एक तरफ नियम प्रदेश में चलने वाले प्री स्कूलों के गले की फांस बन गए हैं और इससे बहुत सारे बच्चों की न केवल पढ़ाई बाधित होगी बल्कि काफी प्री स्कूल्स बन्द होने से बेरोजगारी भी बढ़ेगी। पहले ही पिछले दो सालों से ये स्कूल कोरोना की मार झेल रहे हैं उपर से इस तरह के नियम थोपकर सरकार इन स्कूलों की कमर तोड़ देगी। मीटिंग के दौरान स्कूलों को खोलने का मुद्दा भी गरमाया रहा सभी विकसित देशों में छोटे बच्चों के स्कूल खुले हैं परंतु अपने देश में स्कूल लगभग दो वर्षों से बंद पढ़े हैं। छोटे बच्चे जो दो वर्ष पहले स्कूल जाने चाहिए थे वो अभी भी अपने घरों में बंद हैं। इससे उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास पर बहुत दुष्प्रभाव पढ़ रहा है।

प्ले-स्कूलों की समस्याओं के निदान के लिए एसोसिएशन का गठन

निसा अध्यक्ष डॉ. कुलभूषण शर्मा ने प्ले-स्कूलों की समस्याओं के निदान के लिए एसोसिएशन का गठन भी किया जिसका उद्देश्य एसोसिएशन के विज़न , मिशन व वैल्यूज के साथ शिक्षा की गुणवत्ता व नई शिक्षा निति पर काम करना होगा। इस दौरान प्ले-स्कूल्स एसोसिएशन के मेंबर्स की नई कार्यकारणी गठित की गई जिसमें की मुख्या सलाहकार व संरक्षक अदिति वालिया को बनाया गया एसोसिएशन के प्रधान पद को अभिमन्यू दुहन को सौंपा गया। जनरल सेक्रेटरी ऋतू दुआ, उपाध्यक्ष व उपाध्यक्षा गौरव खन्ना, बलविंदर कौर, मीनाक्षी भूटानी को व सोनिया बक्शी को सचिव नियुक्त किया गया।

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