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Mausam Ki Jankari : हरियाणा सहित दिल्ली, पंजाब व राजस्थान में कई दिन बरसात की संभावना, देखें Weather Update

उत्तरी मैदानी राज्यों हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, एनसीआर दिल्ली के इलाको में मौसम एक बार फिर से करवट लेने वाला है। जिसके चलते पांच जनवरी से दस जनवरी तक इन मैदानी राज्यों में बारिश व सिमित स्थानों पर ओलावृष्टि तथा उत्तरी पर्वतीय इलाकों में भारी मात्रा में हिमपात होने की संभावनाएं बन रही है।

Mausam Ki Jankari
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प्रतीकात्मक तस्वीर। 

उत्तरी मैदानी राज्यों हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, एनसीआर दिल्ली के इलाको में मौसम एक बार फिर से करवट लेने वाला है। जिसके चलते पांच जनवरी से दस जनवरी तक इन मैदानी राज्यों में बारिश व सिमित स्थानों पर ओलावृष्टि तथा उत्तरी पर्वतीय इलाकों में भारी मात्रा में हिमपात होने की संभावनाएं बन रही है। राजकीय महाविद्यालय के पर्यावरण क्लब नोडल अधिकारी डा. चंद्रमोहन ने बताया कि उत्तरी पर्वतीय इलाकों से लगातार एक के बाद एक सक्रिय मौसम प्रणाली वैस्टर्न डिस्टरबेंस का प्रभाव जारी है, जिसके चलते शीतलहर से राहत मिलने लगी है।

उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में पहले चार जनवरी व दूसरे सात जनवरी को वैस्टर्न प्रवेश हो रहा है। जिसकी वजह से पहले दक्षिणी-पश्चिमी राजस्थान पर प्रेरित चक्रवातीय सरकुलेशन बनने से पंजाब व अरब सागर से पर्याप्त मात्रा में नमी प्राप्त करने की संभावनाएं बन रही है। पवनों की दिशा में बदलाव होगा व पवनें दक्षिणी पूर्वी हो जाएगी। जिनकी गति 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी। दक्षिणी पुर्वी नमी वाली पवनों व पछुआ पवनों के मिलन से मैदानी राज्यों में विस्तृत इलाकों पर पांच से दस जनवरी तक विशेषकर हरियाणा, एनसीआर दिल्ली, राजस्थान, पंजाब पर हल्की से सामान्य बारिश और स्थानों पर भारी बारिश, सिमित स्थानों पर ओलावृष्टि और पर्वतीय क्षेत्रों में भारी मात्रा में हिमपात होने का दौर शुरू होने की संभावनाएं बन रही है।

चार जनवरी दोपहर बाद से पूरे इलाके पर बादल अपना डेरा जमा लेंगे और हरियाणा सूबे में पांच, छह, सात व आठ जनवरी को विशेषकर सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, भिवानी, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, महेंद्रगढ़, नारनौल, रेवाड़ी, गुड़गांव, पलवल, फरीदाबाद आदि जिलों और एनसीआर दिल्ली आदि पर हल्की से मध्यम से तीव्र बारिश की संभावना बन रही है। यह हल्की से सामान्य बारिश फसलों के लिए सोना साबित होगी। 11 जनवरी से आसमान साफ हो जाएगा और पवनों की दिशा उत्तरी हो जाएगी। जिसकी वजह से मैदानी राज्यों में न्यूनतम व अधिकतम तापमान में फिर से गिरावट दर्ज होगी। नमी बढ़ने की वजह से कोहरा की भारी मात्रा में बढ़ोतरी होगी और कड़ाके की ठंड से होगी। उसके बाद एक और शीतलहर अपना प्रभाव दिखाएगी।

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