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होली को लेकर बाजार सजे, मगर 'रंगत' गायब

पिछले साल कोरोना के चलते होली फीकी रही थी। बेशक इस बार कोरोना को लेकर पहले जैसा खौफ नहीं है, लेकिन अभी बाजार में ज्यादा चहल-पहल नहीं दिख रही।

होली को लेकर बाजार सजे, मगर रंगत गायब
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बहादुरगढ़ : ग्राहकों का इंतजार करता दुकानदार पंकज।

हरिभूमि न्यूज : बहादुरगढ़

होली में अब मात्र आठ दिन शेष हैं। ऐसे में रंग-गुलाल का बाजार तो तैयार है, मगर दुकानदार माहौल भांप रहे हैं। देश के कई हिस्सों में कोरोना के फिर से बढ़ रहे मामलों के कारण लोगों में उत्साह कम ही दिखाई दे रहा है। वहीं दुकानदार एक दो दिन में ग्राहकों की भीड़ बढ़ने की उम्मीद जता रहे हैं।

बता दें कि 29 मार्च को होली (फाग) है। ऐसे में मेन बाजार, रेलवे रोड व नाहरा-नाहरी रोड समेत अन्य बाजराें में रंग-गुलाल और पिचकारी की दुकानें सज गई हैं। चूंकि पिछले साल कोरोना के चलते होली फीकी रही थी। बेशक इस बार कोरोना को लेकर पहले जैसा खौफ नहीं है, लेकिन अभी बाजार में ज्यादा चहल-पहल नहीं दिख रही।

दुकानदार पंकज का कहना है कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। इसका असर बाजार में दिख रहा है, हालांकि पिछले साल से बेहतर होने की उम्मीद है। इस बार भी लोग सूखी होली खेलना पसंद करेंगे। इसके मद्देनजर गुलाल का ज्यादा स्टाक मंगाया गया है। हर्बल गुलाल की ज्यादा डिमांड है। पानी में घोलने वाले रंग कम मंगाए हैं। ब्रांडेड गुलाल के पैकेट की कीमत 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक है।

दुकानदार नितिन का कहना है कि होली को लेकर तैयारी पूरी कर ली है। कुछ दुकानदारों के पास पिछले साल का स्टाक है। पहले उसे निकालने का प्रयास करेंगे। हालांकि अभी खरीदारी में बहुत तेजी नहीं आई है। उम्मीद है कि होली से तीन-चार दिन पहले बाजार में रंगत दिखे। बाजार में प्रेशर वाली पिचकारी 100 रुपये से 350 रुपये तक की उपलब्ध है। टैंक के रूप में पिचकारी 100 रुपये से लेकर 400 रुपये तक में उपलब्ध है। इसके अलावा बच्चे स्पाइडर मैन, छोटा भीम की पिचकारी को काफी पसंद करते हैं।

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