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महाशिवरात्रि इस बार 101 साल बाद विशेष संयोग

फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी तिथि 11 मार्च को दिन के 2.21 बजे तक है। उसके बाद फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 2.22 बजे लग रही है। जो 12 मार्च को 2.20 बजे तक रहेगी।

महाशिवरात्रि इस बार 101 साल बाद विशेष संयोग
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बहादुरगढ़ : सेक्टर-2 के मंदिर में स्थापित शिवलिंग व शिव परिवार।

हरिभूमि न्यूज : बहादुरगढ़

इस बार महाशिवरात्रि 11 मार्च को मनाई जाएगी। विद्वानों के अनुसार इस बार 101 साल बाद महाशिवरात्रि पर विशेष संयोग बन रहा है। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी तिथि 11 मार्च को दिन के 2.21 बजे तक है। उसके बाद फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 2.22 बजे लग रही है। जो 12 मार्च को 2.20 बजे तक रहेगी। इस बार शिवरात्रि अपने आप में बेहद खास होगा। त्रयोदशी की उदया तिथि में शिवयोग तो प्रदोष व रात्रि में सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग होगा। ऐसे संयोग यदाकदा मिलते हैं।

बता दें कि भगवान शिव और शक्ति का विवाह भी महाशिवरात्रि को हुआ था। अब 101 साल बाद महाशिवरात्रि पर विशेष योग बन रहा है। पंडित महेंद्र शर्मा के अनुसार 11 मार्च को महाशिवरात्रि को व्रत और पूजन किया जाना सर्वोत्तम है। शिवलिंग का पंचोपचार पूजन और रात्रि जागरण विशेष फलदाई होता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना कई गुना अधिक फल देती है। उनके अनुसार शिवरात्रि का अर्थ है, वह रात्रि, जिसका शिवतत्व के साथ घनिष्ठ संबंध है। भगवान शिव जी के अतिप्रिय रात्रि को शिवरात्रि कहा गया है। शिवार्चन और जागरण ही इस व्रत की विशेषता है। इसमें रात्रिभर जागरण एवं रुद्राभिषेक का विधान है।

मान्यता के अनुसार श्री पार्वती जी की जिज्ञासा पर भगवान शिवजी ने बताया कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि कहलाती है। जो उस दिन उपवास करता है, वह मुझे प्रसन्न कर लेता है। शिवपुराण की कोटिरुद्रसंहिता में बताया गया है कि शिवरात्रि व्रत करने से व्यक्ति को भोग एवं मोक्ष दोनों ही प्राप्त होते हैं। शिवरात्रि व्रत करने से महान पुण्य की प्राप्ति होती है।

पंडित महेंद्र शर्मा के अनुसार सबसे पहले सुबह स्नान करके भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान कराएं। उसके बाद केसर के साथ गंगाजल अथवा शुद्ध जल से स्नान कराएं। पूरी रात दीपक जलाकर रखें, भगवान को केसरयुक्त चंदन का तिलक लगाएं। बेलपत्र, भांग-धतूरा, तुलसी, मंजरी जायफल, कमलगट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र और दक्षिणा चढ़ाएं। भगवान भोलेनाथ की आरती श्रद्धाभाव से जरूर करें। इसके बाद केसरयुक्त खीर का भोग लगाएं। ओम नमो भगवते रुद्राय, ओम नम: शिवाय आदि मंत्र का जाप करें। आयोजन को लेकर शहर के मंदिरांे मंे विशेष तैयारियां चल रही हैं। शिवालयों को सजाया संवारा जा रहा है। मंदिर रंग-बिरंगी बिजली की रोशनी से झिलमिलाएंगे।

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