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नई टोकन प्रणाली के बाद भूमि का रिकॉर्ड मेल नहीं खा रहा

सरकार ने रजिस्ट्री के लिए अलग अलग विभागों की एनओसी का सिस्टम लागू किया है। इनमें मुख्य रूप से शहरी स्थानीय निकाय, हुडा और नगर योजनाकार विभाग शामिल हैं। इन तीनों विभागों का रिकॉर्ड कहीं कहीं आपस में मेल नहीं खा रहा है।

नई टोकन प्रणाली के बाद भूमि का रिकॉर्ड मेल नहीं खा रहा
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महम : ई दिशा केंद्र में रजिस्िट्रयां न होने से खाली बैठे कर्मचारी और रिजस्ट्री के काम करने वाले वसीका नवीस कार्यलयों का दृष्य।

अजमेर गोयत : महम

सरकार ने प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रियों में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने और अवैध कॉलोनाइजर्स पर लगाम लगाने के उद्देश्य से रजिस्ट्रियों के लिए नया टोकन सिस्टम लागू किया है। कोरोना काल में कुछ स्थानों पर लगे रजिस्ट्रियों में घोटाले के आरोपों के बाद आई नई टोकन प्रणाली के तहत सभी क्षेत्रों में ऑनलाइन रजिस्ट्रियां शुरू कर दी गई थी। लेकिन महम में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने वालों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार ने रजिस्ट्री के लिए अलग अलग विभागों की एनओसी का सिस्टम लागू किया है। इनमें मुख्य रूप से शहरी स्थानीय निकाय, हुडा और नगर योजनाकार विभाग शामिल हैं। इन तीनों विभागों का रिकॉर्ड कहीं कहीं आपस में मेल नहीं खा रहा है। इसी प्रकार महम के खेतों की जमीन तथा कुछ मोखरा की जमीन के साथ भी हो रहा है। यह पिछले 6 माह से चला आ रहा है लेकिन समाधान नहीं हो पा रहा। जिसको लेकर तहसील कार्यालय मे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसमें जमीन बेचने, खरीदने सहित अनेक कार्य करवाने वालों के सामने समस्याएं खड़ी हो रही हैं । जिससे खास कर प्रापर्टी डीलरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसके विकल्प में लोग जमीन खरीदने व बेचने के बाद फुल पेमेंट एग्रीमेंट साइन कर रहे हैं। जिससे रोज रोज अनेक प्रकार के झगड़े जन्म ले रहे हैं। क्यों कि एग्रीमेंट साइन करने के बाद बदल जाने वाली परिस्थितियों के कारण झगड़े मनमुटाव शुरू हो जाते हैं। प्रापर्टी डीलर धर्मसिंह सैनी, एडवोकेट प्रदीप गोयत व अन्य ने बताया कि कुछ मामलों में ऐसा हो गया है कि विक्रेता जमीन का सौदा कर चल बसा, रुपये लेकर समझौता लिखवाया जा चुका है। उसके बाद मालिकाना हक पाने वाले समझौते से मुकरने लगते हैं। ऐसे में आपस के विवाद जन्म ले रहे हैं।

यह है परेशानी

तहसील में रजिस्ट्री के कार्य में लगे कर्मचारियों ने बताया कि नए सिस्टम के तहत jamabandi.nic.in की साइट पर जाकर टोकन प्राप्त करना होता है। इसमें नगरपालिका के एरिया से बाहर के क्षेत्र के लिए टोकन लगाने की कौशिश की जाती है तो अर्बन आउट साइड एमसी लिमिट में महम क्षेत्र की जमीन को नहीं दर्शाया गया है। इसी प्रकार मोखरा खास की जमीन को म्युनिसिपल लिमिट में दर्शया गया है। जबकि मोखरा खास क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र है। इसी प्रकार मोखरा रोज व मोखरा खेड़ी की जमीन को कहीं भी नहीं दर्शाया जा रहा है। ऐसे में रजिस्ट्रियों होने में परेशानी आ रही है। पिछले 6 माह से महम व मोखरा की जमीन की रजिसि्ट्रयां नहीं हो सकी हैं।

सीएम विंडो पर दी शिकायत, नहीं हो रहा समाधान

लोगों का कहना है कि इसको लेकर कई बार सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया है। रजिस्ट्री के काम में लगे कर्मचारियों का कहना है कि नेशनल इंफोमेंशन सेंटर चंडीगढ़ से इस समस्या का हल निकल सकता है। लेकिन कई बार रिमांइंडर भेजे जाने के बाद भी रिकॉर्ड को सही नहीं किया गया है। इसलिए परेशानी आ रही है।

कर्मचारी व वसीका नवीस भी हुए खाली

वसीका नवीस सीताराम, सतबीर सिंह सुभाष वर्मा व नक्सा नवीस रणवीर गोयत आदि का कहना है कि जब तक विभागों का आपस में रिकॉर्ड मैच नहीं करेगा नया सिस्टम कारगर नहीं हो सकता। सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए रजिस्ट्रियां ऑनलाइन करके अच्छा कदम उठाया है। मगर नये सिस्टम को न तो पहले सही से जांचा गया, और न ही सभी विभागों के रिकॉर्ड को पहले मैच किया गया। ऐसे में जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रजिस्ट्रियां न होने से उनका काम भी प्रभावित हो रहा है। महम क्षेत्र की जमीन की ही सबसे ज्यादा खरीद फरोक्त होती है, रजिस्ट्रियां न होने से कर्मचारी भी खाली हो गए हैं।

भेजा गया रिमाइंडर

नई टोकन प्रणाली के तहत अभी कुछ परेशानियां आ रही हैं। जिसे बार बार विभाग के संज्ञान में लाया जा रहा है। इस बारे में भी सरकार को रिमांइंडर भेजा जा चुका है। संभावना है कि एक सप्ताह में रिकॉर्ड सही हो जाने के बाद प्रभावित क्षेत्रों की रजिस्ट्रियां चालू हो सकेंगी। मदनलाल तहसीलदार महम।

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