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कुरुक्षेत्र के वेटर्नर एथलीट वीरभान राणा ने जीते 3 पदक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा का नाम किया रोशन

इस अंतर्राष्ट्रीय वेटर्नर एथलीट ने 2 हजार मीटर स्टीपलचेज में स्वर्ण पदक, 5 हजार मीटर वॉक में रजत पदक और 800 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया है। अहम पहलू यह है कि वेटर्नर एथलीट वीरभान ने अब तक अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में 7 मेडल हासिल कर लिए हैं।

कुरुक्षेत्र के वेटर्नर एथलीट वीरभान राणा ने जीते 3 पदक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा का नाम किया रोशन
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कुरुक्षेत्र : कुरुक्षेत्र के 60 वर्ष से ज्यादा आयु के वेटर्नर एथलीट वीरभान राणा ने अंतर्राष्ट्रीय वेटर्नर एथलीट टूर्नामेंट में 3 मेडल जीतकर कुरुक्षेत्र ही नहीं हरियाणा का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। इस अंतर्राष्ट्रीय वेटर्नर एथलीट ने 2 हजार मीटर स्टीपलचेज में स्वर्ण पदक, 5 हजार मीटर वॉक में रजत पदक और 800 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया है। अहम पहलू यह है कि वेटर्नर एथलीट वीरभान ने अब तक अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में 7 मेडल हासिल कर लिए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय वेटर्नर खिलाड़ी वीरभान राणा का सोमवार को साई सेंटर कुरुक्षेत्र में पहुंचने पर साई के साथ-साथ अन्य प्रशिक्षकों और गणमान्य लोगों द्वारा जोरदार स्वागत किया गया। अंतर्राष्ट्रीय वेटर्नर खिलाड़ी वीरभान राणा का साई इंचार्ज कुलदीप सिंह वड़ैच, अंतर्राष्ट्रीय वेटर्नर खिलाड़ी वीरभान के प्रशिक्षक एवं साई के वरिष्ठ कोच सतपाल सिंह, साई के पूर्व हॉकी चीफ कोच गुरविंद्र सिंह, डीआईपीआरओ डा. नरेंद्र सिंह, सेवानिवृत डीएसओ यशबीर सिंह राणा, प्रशिक्षक नरेंद्र ठाकुर, प्रशिक्षक चांद राम, नरेश कुमार, अजायब सिंह, जम्मन बहादुर, मोर सिंह आदि ने फूल-मालाओं का जोरदार स्वागत किया।

अंतर्राष्ट्रीय वेटर्नर खिलाड़ी वीरभान राणा ने कहा कि पैसिफिक मास्टर्स एथलेटिक्स इंडिया-2023 अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन 29 जनवरी से 2 फरवरी 2023 तक गोवा में किया गया। इस प्रतियोगिता में विभिन्न देशों सहित कुल 200 से ज्यादा एथलीट ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता के 2 हजार मीटर स्टीपलचेज इवेंट में पहला स्थान प्राप्त किया जबकि 5 हजार मीट वॉक में दूसरा और 800 मीटर दौड़ में तृतीय स्थान हासिल किया। उन्होंने इसका सारा श्रेय प्रशिक्षक सतपाल सिंह और परिवार के सदस्यों को दिया है। प्रशिक्षक सतपाल सिंह ने उन्हें प्रशिक्षित करने का काम किया जबकि परिवार के सदस्यों ने उनका हर कदम पर सहयोग करने का काम किया।

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