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किसान आंदोलन : संदिग्ध युवक ने किसान संगठनों के युवकों पर जड़े आरोप, बोला : किसानों ने बनाया मुझे बलि का बकरा

पुलिस की शुरूआती जांच में किसी तरह की साजिश रचे जाने का मामला सामने नहीं आया है। न ही युवक की कॉल डिटेल व पूछताछ में उसके किसी संदिग्ध से संबंध मिले हैं।

किसान आंदोलन : संदिग्ध युवक ने किसान संगठनों के युवकों पर जड़े आरोप, बोला : किसानों ने बनाया मुझे बलि का बकरा
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हरिभूमि न्यूज. सोनीपत। कुंडली बॉर्डर ट्रैक्टर परेड में हिंसा फैलाने की साजिश में पकड़े गए संदिग्ध युवक ने पिटाई से डरकर यह पूरी कहानी बनाई थी। पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने किसान संगठन के युवकों पर मारपीट करने व उसे कहानी बनाने पर विवश करने का आरोप लगाया है।

पुलिस की शुरूआती जांच में किसी तरह की साजिश रचे जाने का मामला सामने नहीं आया है। न ही युवक की कॉल डिटेल व पूछताछ में उसके किसी संदिग्ध से संबंध मिले हैं। उसके बावजूद पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस व प्रशासन की दो टीम बनाई गई है। साथ ही साजिश के आरोप में पकड़े युवक व मां के बयान अलग होने पर भी पुलिस का कहना है कि युवक डरा हुआ था। जिसके चलते अलग बयान दिए हैं।

एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा ने शनिवार देर शाम पत्रकार वार्ता में बताया कि किसान नेताओं ने शुक्रवार रात को एक युवक के साथ पत्रकार वार्ता की थी। उसमें राई थाना के एक इंस्पेक्टर को आधार बनाकर पुलिस पर किसान नेताओं की हत्या की साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे। उसके बाद युवक को पुलिस को सौंप दिया गया था। जिस पर दो डीएसपी, कुंडली व सीआईए के इंस्पेक्टर की टीम बनाकर उसकी जांच कराई।

जांच में पाया गया कि योगेश के सभी आरोप बेबुनियाद हैं। वह मुख्यमंत्री की सभा के मंच को उखाडऩे में शामिल नहीं था। उसके किसी संदिग्ध व्यक्ति या संगठन से संबंधों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। उसकी कॉल डिटेल में ऐसा कुछ सामने नहीं आया है।

उसने लैंडलाइन नंबर से फोन आने की बात कही, वह नंबर भी उसकी कॉल डिटेल में नहीं आया। युवक की लॉकडाउन में नौकरी चली गई थी। जिसके बाद से वह बेरोजगार है। वह कुंडली धरना स्थल पर गया था और चाउमीन की रहेड़ी पर किसान संगठन के युवकों से झगड़ा हो गया था। इसकी पुष्टि चाउमीन की रेहड़ी लगाने वाली महिला ने भी की है।

एसपी ने बताया कि वहां कहासुनी के बाद योगेश को संगठन में शामिल युवक किसी कैंप में ले गए थे। उसका आरोप है कि वहां ले जाकर मारपीट की गई। योगेश ने बताया कि उसने डर की वजह से मीडिया के सामने बातचीत में कहानी बना दी थी।

कुछ उसे किसान संगठन में शामिल युवकों ने बोलने को कहा था। उसके बाद ही पुलिस पर आरोप लगाए। वह किसी पुलिस इंस्पेक्टर को नहीं जानता है। उसके बाद भी जांच के लिए दो टीम गठित कर दी हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी सामने आएगा उसके अनुसार कार्रवाई होगी। फिलहाल पूछताछ के लिए योगेश के माता-पिता व परिवार के सदस्यों को लाया गया है। योगेश से ऐसे गंभीर आरोप लगवाने वालों की पहचान किया जाना जरूरी है।



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