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बनने से पहले ही विवादों में आया कैथल का संस्कृत विश्वविद्यालय, जानें क्यों

श्री लव-कुश महातीर्थ ट्रस्ट मुंदड़ी कैथल के पदाधिकारियों ने गांव मुंदडी में स्थित महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में की गई भर्तियों में धांधली का आरोप लगाया है।

बनने से पहले ही विवादों में आया कैथल का संस्कृत विश्वविद्यालय, जानें क्यों
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श्री लव-कुश महातीर्थ ट्रस्ट मुंदड़ी कैथल के पदाधिकारी शिकायत को दिखाते हुए।

हरिभूमि न्यूज. कैथल

श्री लव-कुश महातीर्थ ट्रस्ट मुंदड़ी कैथल के पदाधिकारियों ने हनुमान वाटिका में आयोजित पत्रकारवार्ता में गांव मुंदडी में स्थित महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में की गई भर्तियों में धांधली का आरोप लगाया है। ट्रस्ट के सदस्य महिंद्र मुंदडी सूरज क्योडक आदि ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में की गई भर्तियों के गोलमाल में पहले भी ट्रस्ट कुलपति व विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मुख्यमंत्री निवास चंड़ीगढ़ कर चुके है, जिस पर कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।

जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय, सीवीसी, यूजीसी, डीजीपी व अन्य स्थानों पर की शिकायत की जा चुकी है, जिस पर पीएमओ की तरफ से कार्रवाई करते हुए हरियाणा सरकार से दो-तीन शिकायतों पर आरटीआई मांगी जा चुकी है, लेकिन कुलपति ने अपनी सर्विस का समय कम रहते देख जल्दबाजी में भर्ती करने का निर्णय लिया। जोकि असंवैधानिक व कानूनी प्रक्रिया के विरूद्ध है। उन्होंने कहा कि इसको देखते हुए ट्रस्ट की तरफ से एक अपील हाईकोर्ट में भी दायर की गई है। जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कुलपति व कुलसचिव को भर्ती बारे कानूनी नोटिस भी भेजा गया है। लेकिन इसके बावजूद कुलपति ने सरकार व कार्य परिषद को गुमराह करते हुए वर्ष 2021 फरवरी माह में ऑनलाइन बैठक बुलाकर साक्षात्कार के अगले दिन ही नियुक्तियां कर दी गई। जो सरासर गलत है, क्योंकि कुलपति ने यह भर्तियां महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के नाम से की गई है, जबकि गजट में इस नाम से कोई विश्वविद्यालय ही नहीं है। जबकि विश्वविद्यलय महर्षि बाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के नाम से हरियाणा सरकार के गजट में है।

इन नियुक्तियों का विज्ञापन फरवरी 2020 में निकाला गया था, जबकि नियमानुसार विज्ञापन की तिथि के 6 माह के अंदर नियुक्तियां प्रदान करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि उक्त नियुक्तियों में की गई व्यापक धांधलियों को देखते हुए ट्रस्ट ने एक नाम सहित शिकायत पीएमओ, राज्यपाल व अन्य उच्चाधिकारियों को भेजी है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में दायर याचिका के आधार पर उच्चतर शिक्षा विभाग को निर्देश जारी कर हरियाणा सरकार को कार्रवाई करने को कहां गया है। उनकी मांग है कि जिस तरह से इन नियुक्तियों पर आगामी कार्रवाई के लिए रोक लगाई गई है, इसी तरह दी गई नियुक्तियों को भी निरस्त करके नियमानुसार भर्ती की जाए। विश्वविद्यालय के कुलपति डा. श्रेयांश द्विवेदी ने कहा कि भर्ती की प्रक्रिया पूरी तरह से नियमानुसार व पारदर्शिता से की गई है। भर्ती में धांधली के आरोप पूरी तरह से निराधार व बेबुनियाद हैं।

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