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संकल्प : पॉलीथिन मुक्त शहर बनाने की लौ जला रही दादरी की ज्योति

ज्योति गलियों व सड़क पर पड़े कई क्विंटल पॉलीथिन व प्लास्टिक एकत्रित कर चुकी है। पिछले 7 वर्षों से ज्याेति अच्छी छात्रा के साथ-साथ पॉलीथिन मुक्त शहर के अलावा पौधरोपण, पक्षियों के लिए दाना पानी, रक्तदान, शिक्षा प्रसार में अग्रणी हैं।

संकल्प : पॉलीथिन मुक्त शहर बनाने की लौ जला रही दादरी की ज्योति
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ज्याेति शर्मा 

चरखी दादरी : करीब 7 चार साल पहले दादरी के घिकाड़ा रोड निवासी ज्याेति शर्मा को पॉलीथिन की दुष्प्रभाव का पता चला तो उसी दिन तो एक अभियान शुरू कर दिया। कुछ ही दिन में अभियान का व्यापक असर देखने को मिला। ज्योति गलियों व सड़क पर पड़े कई क्विंटल पॉलीथिन व प्लास्टिक एकत्रित कर चुकी है। पिछले 7 वर्षों से ज्याेति अच्छी छात्रा के साथ-साथ पॉलीथिन मुक्त शहर के अलावा पौधरोपण, पक्षियों के लिए दाना पानी, रक्तदान, शिक्षा प्रसार में अग्रणी हैं। पॉलीथिन मुक्त शहर अभियान को लेकर डॉक्टर एसएन सुब्बाराव द्वारा सम्मान मिल चुका है। ज्योति का प्रशिक्षु से एक जिम्मेदार स्वयंसेवक बनने का सफर जनता महाविद्यालय 2014 से शुरू हुआ था। जहां पर अनुशासन समय बाध्यता एवं अंतर सेवा जैसे मूलभूत गुण हमें सिखाए गए। पाठ्यक्रम गतिविधियों में राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़कर आपस में जीवन पर्यटन संबंध मित्रता एवं प्रेरणा का पाठ सीखने को मिला। ज्योति फिलहाल नेहरू युवा केंद्र में राष्ट्रीय युवा स्वयं सेवक के तौर पर कार्यरत है।

ज्याेति ने बताया कि कालेज में प्रथम वर्ष ही पॉलीथिन व प्लास्टिक के दुष्प्रभाव की पूर्ण जानकारी मिली। उसी दिन से पॉलीथिन मुक्त शहर बनाने का संकल्प लिया। कालेज के बाद शहर के बाजारों व गलियों में पॉलीथिन मुक्ति के लिए अभियान शुरू किया। आरंभ में लोगों का अच्छा सहयोग नहीं मिला, लेकिन ज्याेति ने हार नहीं मानी। छात्रा ने पॉलीथिन का विकल्प बताया। कुछ कपड़े के थैले तैयार किए और शॉपिंग करने आए लोगों को मुफ्त वितरित किए।

सीवरेज से निकाला पॉलीथिन

ज्योति शर्मा अब तक गलियों व सीवरों में फंसी 20 क्विंटल पॉलीथिन व प्लास्टिक की बोतलें एकत्रित कर चुकी है। अभियान में एक टीम की तरह वर्क किया जाता है। ज्योति कहती हैं कि किसी भी अभियान की सफलता महिलाओं को शामिल किए बिना संभव नहीं। किसी भी काम में महिलाओं की सहभागिता आवश्यक है। पॉलीथिन का प्रयोग रोकने में तो उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। छात्राएं गलियों में डोर टू डोर महिलाओं को पॉलीथिन छोड़ने के लिए जागरूक कर रही हैं। महिलाओं को पॉलीथिन की जगह कपड़े का थैला प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पिछले एक माह से पॉलीथिन व प्लास्टिक एकत्रित करने का अभियान चल रहा है।

कॉलेज के विद्यार्थियों को जोड़ा

ज्योति ने कहा कि किसी भी काम को अभियान के तौर पर किसा जाए तभी उसमें सफलता मिलती है। बड़े पैमाने पर अभियान के लिए लोगों का जुड़ना भी जरूरी है, तभी लोगों में जागरुकता आती है। ज्योति ने कहा कि पॉलीथिन से कालेज के दूसरे विद्यार्थियों को जोड़ा गया। इसके बाद शहर से लेकर गांव की गलियों तक व्यापक अभियान चलाया गया। ज्योति ने बताया कि पॉलीथिन व प्लास्टिक की बोतलों का बुरा प्रभाव पड़ रहा है। दादरी शहर में बारिश के दिनों में अक्सर जलभराव की स्थिति रहती है। जिसका एक कारण पॉलीथिन व प्लास्टिक की बोतलें भी हैं। लोग प्रयोग के बाद पॉलीथिन को फेंक देते हैं, जो पानी के साथ सीवर में चला जाता है। पॉलीथिन सड़ता व गलता नहीं है और सीवर में जाने के बाद जाम कर देता है। जाम सीवरों को खोलने के लिए सरकार को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

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