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लाखों छात्रों काे पछाड़कर इंटरनेशनल मैथ ओलंपियाड में विश्व में प्रथम रही जींद की दुर्वा

इस ओलंपियाड में 32 देशों के 1400 शहरों के 56000 स्कूलों के लाखों विद्यार्थियों ने भागीदारी की थी। दुर्वा ने इंटरनेशनल स्तर पर पहला रैंक हासिल किया।

लाखों छात्रों काे पछाड़कर इंटरनेशनल मैथ ओलंपियाड में विश्व में प्रथम रही जींद की दुर्वा
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दुर्वा को मिला सर्टिफिकेट।

हरिभूमि न्यूज. जींद

शैक्षणिक सत्र 2019-20 के दौरान ब्रिटिश काउंसिल की ओर से इंटरनेशनल मैथ ओलंपियाड का आयोजन किया गया था। इस ओलंपियाड में 32 देशों के 1400 शहरों के 56000 स्कूलों के लाखों विद्यार्थियों ने भागीदारी की थी। जिसमें जींद के गांधी नगर निवासी दूसरी कक्षा की छात्रा दुर्वा ने सबको पछाड़ते हुए इंटरनेशनल स्तर पर पहला रैंक हासिल किया है। दुर्वा की इस उपलब्धि पर मां रचना बताती हैं कि वह एक फार्मूले के 10-12 सवाल बनाकर देती हैं। घुमा-फिराकर सवाल बना देती हैं। इसी कारण दुर्वा के सभी फार्मूले क्लीयर हैं।

गौरतलब है कि बच्चों को मैथ के सवालों से सबसे ज्यादा डर लगता है। गुणा-भाग और जमा के पचड़े में पडऩे के बजाय अंग्रेजी व दूसरे विषयों की किताबें चाव से पढ़ते हैं लेकिन दुर्वा गर्ग को गणित के सवाल सुलझाने में ही सबसे ज्यादा मजा आती है। मैथ में रुचि के कारण दुर्वा ने पिछले साल दूसरी कक्षा में इंटरनेशल मैथ ओलंपियाड में भागीदारी की थी। अब जारी हुए परीक्षा परिणाम में दुर्वा ने 32 देशों के प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए इंटरनेशनल स्तर पर पहला रैंक हासिल किया है। बेटी दुर्वा की सफलता पर माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। दुर्वा के पिता मुनीष गर्ग बिजनेसमैन हैं और मां रचना गृहिणी हैं। दुर्वा की पढ़ाई का जिम्मा मां ही संभालती हैं। रचना गर्ग ने बताया कि वह खुद एमकॉम, बीएड पास हैं। इसलिए बेटी को मैथ पढ़ाते समय एक तरह के दस-बारह सवाल लिखकर दे देती हैं। जो सवाल नहीं आता, उसे सरल तरीके से समझाती हैं। इससे दुर्वा की मैथ में रुचि बढ़ गई है। अभी 20 तक पहाड़े बहुत अच्छी तरह याद हैं। पढ़ाई में लग्न के कारण ही इंटरनेशनल मैथ ओलंपियाड में पूरे विश्व में पहले नंबर पर रही।

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