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रोडवेज बसों की कमी से जूझ रहा जींद डिपो

जींद डिपो के बेड़े में फिलहाल 167 रोडवेज बसों के अलावा 22 किलोमीटर स्कीम की बसें चल रही हैं। इन 167 बसों के सहारे हर रोज 15 हजार से ज्यादा यात्री इधर से उधर यात्रा करते हैं।

रोडवेज बसों की कमी से जूझ रहा जींद डिपो
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 जींद बस स्टैंड का फोटो।

हरिभूमि न्यूज : जींद

रोडवेज के जींद डिपो बसों की भारी कमी है। विधानसभा बजट के दौरान वित्त मंत्री मनोहरलाल ने परिवहन विभाग में बसों की संख्या पांच हजार तक ले जाने और इसके लिए बजट अलॉट किए जाने की घोषणा की है। अब डिपो प्रबंधन को आस है कि बसों की कमी दूर होगी। डिपो प्रबंधन द्वारा मुख्यालय से 75 नई बसों की मांग भेजी गई है।

इस समय डिपो में फिलहाल 167 बसें ही हैं। अगर जल्द ही डिपो को डिमांड के अनुसार बसें मिल जाती हैं तो यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल जाएगी। जींद डिपो के बेड़े में फिलहाल 167 रोडवेज बसों के अलावा 22 किलोमीटर स्कीम की बसें चल रही हैं। इन 167 बसों के सहारे हर रोज 15 हजार से ज्यादा यात्री इधर से उधर यात्रा करते हैं।

साल 2018 में डिपो को 30 नई बसें मिली थी। उसके बाद डिपो में नई बसें तो शामिल हुई नहीं। इसके विपरीत हर साल 10 से ज्यादा बसें कंडम होती गई और आज फिर से डिपो उसी स्थिति पर पहुंच गया है जहां तीन साल पहले था। डिपो में कभी बसों की संख्या 200 से ज्यादा थी लेकिन अब मात्र 167 बसें रह गई हैं। आबादी लगातार बढ़ रही है और बसों की संख्या लगातार घट रही है। वर्ष 2020-21 में जींद डिपो की करीब 40 बसें कंडम घोषित हो जाएंगी। रोडवेज बस की कंडम होने की समय सीमा आठ साल निर्धारित की हुई है। आठ साल के बाद इन बसों को कंडम घोषित कर ऑफ रूट कर दिया जाता है। ऐसे में 40 बसें कम हो जाने पर डिपो में बसों की संख्या बहुत कम रह जाएगी। इसलिए डिपो में नई बसों को शामिल किया जाना जरूरी हो गया है।

75 बसों की भेजी गई है डिमांड : जीएम

जींद डिपो महाप्रबधंक बिजेंद्र हुड्डा ने बताया कि डिपो प्रबंधन द्वारा मुख्यालय 75 बसों की डिमांड की गई है। आशा है कि जल्द ही डिपो में नई बसें शामिल होंगी। रोडवेज बसों की कमी के बावजूद परिवहन की बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।

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