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किसान आंदोलन में रोजाना पहुंच रही देशी घी से बनी जलेबियां

देशी घी की जलेबियां बनाने का सारा खर्च गांव से चंदा एकत्रित कर उठाया जा रहा है। इसके लिए गांव से अलग-अलग ग्रामीणों की ड्यूटियां लगाई जा रही है। जिसका ग्रामीण बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।

किसान आंदोलन में रोजाना पहुंच रही देशी घी से बनी जलेबियां
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हरिभूमि न्यूज. सोनीपत। तीन कृषि कानूनों के विरोध में कुंडली बॉर्डर पर डटे किसानों को चौतरफ सहयोग मिल रहा है। सोनीपत के गांव भैंसवान खुर्द की तरफ से यहां करीब 5 हजार लोगों के लिए रोजाना देशी घी की जलेबियां बनाई जा रही हैं।

देशी घी की जलेबियां बनाने का सारा खर्च गांव से चंदा एकत्रित कर उठाया जा रहा है। इसके लिए गांव से अलग-अलग ग्रामीणों की ड्यूटियां लगाई जा रही है। जिसका ग्रामीण बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। यही नहीं धरनास्थल पर आस-पास क्षेत्र के ग्रामीणों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक किसानों का आंदोलन चलेगा, तब तक वे किसानों को किसी प्रकार की कमी महसूस नहीं होने देंगे।

बता दें कि दिल्ली की सीमाओं को सील किए बैठे किसान 51 दिनों से आंदोलनरत है। 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर तिरंगा परेड के ऐलान के बाद यह आंदोलन रोजाना विशाल होता जा रहा है। यहां रोजाना सैंकड़ों ट्रैक्टर-ट्रालियां जुट रहे हैं। अकेले कुंडली बार्डर पर किसानों के धरने का दायरा अब बढ़ते हुए करीब 9 किलोमीटर तक फैल चुका है।

यूं तो यहां लगातार किसानों को हर सुविधा देने के लिए लोग सामने आ रहे हैं, लेकिन पंजाब के किसानों की मदद के लिए हरियाणा के ग्रामीण जी-जान से जुट गए हैं। गोहाना की मशहूर जलेबियों की चाशनी यहां भाईचारे की मिठास बढ़ाने का काम कर रही है। सोनीपत के कई गांवों ने भी यहां विशेष जिम्मेदारी संभाल ली है। सोनीपत के गांव भैंसवान खुर्द की ओर से जलेबी का भंडारा चलाया जा रहा है और यहां रोजाना करीब 200 से 300 क्विंटल जलेबियां किसानों व राहगीरों को खिलाई जाती हैं।

एक अनुमान के अनुसार यहां रोजाना 5 हजार से ज्यादा लोग जलेबियों का सेवन कर रहे हैं। लगातार ठंड बढ़ने के कारण जलेबियों की डिमांड भी बढ़ रही है। जलेबियां बनाने से लेकर परोसने तक सभी सेवा कार्य ग्रामीण ही कर रहे हैं। जलेबियां बनाने के लिए रोजाना अलग-अलग किसानों की ड्यूटियां यहां लगाई जा रही हैं। ये ग्रामीण जलेबियां बनाने के साथ ही लंगर में पहुंचने वालों को भी जलेबियां वितरित करते हैं।



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