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स्वास्थ्य सेवाओं का ये हाल : एंटी रेबीज इंजेक्शन की जगह बुजुर्ग महिला को टेटनेस का इंजेक्शन लगाकर चलाया काम

पीड़ित बुजुर्ग महिला ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कार्यालय में जाते समय उक्त गली में आवारा कुत्तों के आंतक से हर कोई परेशान है।

स्वास्थ्य सेवाओं का ये हाल : एंटी रेबीज इंजेक्शन की जगह बुजुर्ग महिला को टेटनेस का इंजेक्शन लगाकर चलाया काम
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 बुजुर्ग महिला कुत्ते के काटने के बाद बहता हुआ रक्त व कुत्ते के काटने के बाद पैर को दिखाते हुए बुजुर्ग महिला।

हरिभूमि न्यूज. गन्नौर

किसी काम के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग कार्यालय में गई महिला को वापस आते समय कुत्ते ने काट लिया। उसके बाद बुजुर्ग महिला को जब सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र में लग जाया गया तो वहां मरीज को 5 रुपये की पर्ची काटकर सिर्फ टेटनेस का इंजेक्शन लगाकर एंटी रेबीज इंजेक्शन न होने पर घर जाने के लिए कहा। पीड़ित बुजुर्ग महिला ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कार्यालय में जाते समय उक्त गली में आवारा कुत्तों के आंतक से हर कोई परेशान है। अगर केन्द्र के चिकित्सकों की माने तो उनका मानना है कि महीने में कई लोग कुत्ते व बंदर के काटने से टीका लगवाने आते है लेकिन टीका न होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ता है।

अस्पताल में पिछले कई माह से एंटी रेबीज के टीके खत्म हो रहे है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। प्राइवेट अस्पताल में ये टीका तीन सौ से चार सौ रुपये तक लगाया जाता है। शहरवासियों का कहना कि शहर में बंदरों व आवारा कुत्तों के आंतक के बावजूद प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है।

गन्नौर गांव की बुजुर्ग महिला भरती देवी ने बताया कि उसे कुत्ते ने काट लिया। उसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप उसे उपचार के लिए सामुदायिक केन्द्र में लेकर गया तो डॉक्टर ने एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगाने की बजाय टेटनेस का इंजेक्शन लगा दिया और कहा कि एंटी रेबीज इंजेक्शन खत्म है। वे प्राइवेट अस्पताल में लगवा ले।

एंटी रेबीज इंजेक्शन आने हो गए है बंद : एसएमओ

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एसएमओ डॉ. टीना आनंद ने बताया कि सीएचसी में अब एंटी रेबीज इंजेक्शन की दवाई आती नहीं है। कई महीने हो गए है। जिसके चलते अस्पताल में आने वाले मरीजों को सिर्फ टेटनेस का टीका ही लगाया जा रहा है।

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