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उद‍्योगों को मिलेगी सस्ती बिजली, हरियाणा सरकार ने बनाई पावर टैरिफ सब्सिडी योजना

‘डी’ श्रेणी खंडों में 40 किलोवाट और ‘सी’ श्रेणी खंडों में 30 किलोवाट या उससे कम के कनेक्टेड लोड वाले सभी मौजूदा और नए सूक्ष्म एवं लघु औद्योगिक उद्यमों को बिजली टैरिफ सब्सिडी का लाभ मिलेगा और उन्हें प्रति यूनिट 2 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी।

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पावर टैरिफ सब्सिडी योजना

हरियाणा सरकार ने राज्य में स्थित सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को सस्ती बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हरियाणा उद्यम एवं रोजगार नीति-2020 के तहत 'पावर टैरिफ सब्सिडी' योजना अधिसूचित की है। हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि यह योजना पहली जनवरी, 2021 से प्रभावी मानी जाएगी और सरकार द्वारा इसे अधिक्रमित किए जाने तक प्रचालन में रहेगी।

उन्होंने बताया कि राज्य के 'डी' श्रेणी खंडों में 40 किलोवाट और 'सी' श्रेणी खंडों में 30 किलोवाट या उससे कम के कनेक्टेड लोड वाले सभी मौजूदा और नए सूक्ष्म एवं लघु औद्योगिक उद्यमों को बिजली टैरिफ सब्सिडी का लाभ मिलेगा और उन्हें प्रति यूनिट 2 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, उद्यम इस लाभ के लिए तब तक पात्र होंगे जब तक यह उत्पादन में रहेंगे।

प्रवक्ता ने बताया कि उद्यमों को यह लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। अपितु बिजली कंपनियां/निगम अर्थात उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन/डीएचबीवीएन) बिजली बिलों में सब्सिडी राशि काटकर यह लाभ प्रदान करेंगे। उन्होंने बताया कि यूएचबीवीएन/ डीएचबीवीएन को निधियों की मंजूरी के लिए निदेशक/महानिदेशक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सक्षम प्राधिकारी होंगे। यूएचबीवीएन/डीएचबीवीएन द्वारा दी गई बिजली टैरिफ सब्सिडी की राशि की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग द्वारा अपने आबंटित बजट से प्रतिपूर्ति की जाएगी।

उन्होंने बताया कि यदि किसी भी स्तर पर यह पाया जाता है कि आवेदक ने गलत तथ्यों के आधार पर सहायता का दावा किया है तो आवेदक को 12 प्रतिशत प्रति वर्ष के चक्रवृद्धि ब्याज दर के साथ सहायता राशि लौटानी होगी और उनके विरूद्घ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा, उसे राज्य सरकार से किसी भी प्रोत्साहन / सहायतानुदान से वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि आवेदक अनुदान की राशि ब्याज सहित वापस करने में विफल रहता है तो राशि भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल की जाएगी।

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