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रोहतक पीजीआई में कोरोना संक्रमित बच्चे को छोड़कर गए परिजनों को आधार कार्ड से ढूंढ निकाला

तीन जून को एक दंपती अपने 4 साल के बच्चे दीपक का इलाज कराने पहुंचे थे और उसके कोरोना संक्रमित मिलने पर उसे वहीं छोड़कर भाग गए थे।

रोहतक पीजीआई में कोरोना संक्रमित बच्चे को छोड़कर गए परिजनों को आधार कार्ड से ढूंढ निकाला
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रोहतक पीजीआई में बच्चे के पास पहुंचे उसके दादा कन्हैया।

रोहतक पीजीआई में कोरोना संक्रमित चार साल के बच्चे को छोड़कर गए उसके परिजनों की पहचान कर ली गई है। पीजीआईएमएस के ट्रामा सेंटर में भर्ती फिलहाल वार्ड 14 में भर्ती बच्चे के परिजनों को डॉ महेश माहला ने आधार कार्ड के माध्यम से ढूंढ लिया है।

पीजीआई में तीन जून को आए बच्चे मनीष के दादा कन्हैया मांझी को ढूंढ निकाला। पीजीआई के डीएमएस डॉ. महेश मेहला ने बच्चे के फिंगर प्रिंट और फिर आधार का डाटा निकलवाकर बच्चे के परिजनों को ट्रेस किया। फिलहाल बच्चा पीजीआई में उपचराधीन है और उसका दादा उसके पास है। बता दें कि 3 जून को चार साल का बच्चा पीजीआई में लाया गया था। 10 जून को उसे ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया। भर्ती करवाते समय उसके पिता ने अपना नाम दीपक लिखवाया और आधार कार्ड भी जमा करवाया। 12 जून की शाम तक जब दीपक या बच्चे का कोई परिजन नहीं आया तो डॉक्टर्स ने पुलिस का सहारा लिया।

पुलिस ने दीपक द्वारा लिखवाए पते सोनीपत के पास गांव में जाकर पता किया, लेकिन कहीं पता नहीं लग पाया। पीजीआई से सीसीटीवी फुटेज निकालाकर उसके माता-पिता की फोटो की पहचान की गई। डीएमएस डॉ. महेश मेहला ने बच्चे के फिंगर प्रिंट लिए और आधार कार्ड के सहारे उसके परिजनों को ट्रेस कर लिया। बच्चे का पिता बिहार नालंदा के पास गांव राहूनगर का रहने वाला है। छानबीन तेज की गई तो पता चला कि उसका दादा सोनीपत के पास एक ईंट-भट्ठे पर काम करता है। पुलिस की सहायता से उसे तलाश गया और बच्चे से मिलवाया। बच्चे मनीष और दादा कन्हैया ने एक दूसरे को पहचान लिया है। दादा को मनीष के बारे में यह नहीं पता था कि उसे पीजीआई में छोड़कर उसका बेटा फरार हो गया है। फिलहाल बच्चे को एक सप्ताह पीजीआइ्र में रखा जाएगा। उसका दादा बच्चे की देखभाल कर रहा है।

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