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IAS अशोक खेमका को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, प्रतिकूल टिप्पणी पर रोक लगाई

शूटर खिलाड़ी विश्वजीत सिंह के मामले में हाई कोर्ट की एकल बेंच द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणी को अशोक खेमका ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी।

IAS अशोक खेमका को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, प्रतिकूल टिप्पणी पर रोक लगाई
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IAS Ashok Khemka

Haribhoomi News : हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईएएस अफसर अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल बेंच द्वारा उनके खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणी पर रोक लगा दी है। शूटर खिलाड़ी विश्वजीत सिंह के मामले में हाई कोर्ट की एकल बेंच द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणी को अशोक खेमका ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी।

विश्वजीत सिंह का पिछले साल खेल कोटे से एचसीएस (हरियाणा सिविल सर्विस) में चयन हुआ था, लेकिन आईएएस अशोक खेमका ने विश्वजीत के स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट पर सवाल उठाए थे। इसके बाद सरकार ने विश्वजीत के नियुक्ति पत्र पर रोक लगा दी थी। सरकार के इस कदम को विश्‍वजीत ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। 29 जनवरी को हाई कोर्ट की एकल बेंच ने विश्‍वजीत को नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश देते हुए खेमका पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी।इससे पहले हाई कोर्ट के जस्टिस अजय तिवारी पर आधारित डिविजन बेंच ने अपील पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार को 20 अप्रैल के लिए नाेटिस जारी कर जवाब तलब किया था।

हाई कोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्यों न वह एकल बैंच द्वारा की गई टिप्पणी पर रोक लगा दे। अपनी अपील में खेमका ने कहा कि सिंगल बेंच की तल्ख टिप्पणी पूरी तरह से निराधार व प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है। जस्टिस सेहरावत ने शूटर विश्वजीत सिंह को खेल कोटा के तहत राज्य सिविल सेवा में नियुक्त का आदेश दिया था। विश्वजीत ने एचसीएस अधिकारी के रूप में शामिल करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, क्योंकि खेमका ने विश्वजीत को जारी किए गए खेल ग्रेडेशन सर्टिफिकेट पर सवाल उठाया था। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने खेमका के खिलाफ टिप्पणी करते हुए कहा था कि खेमका द्वारा खेल ग्रेडेशन सर्टिफिकेट पर उठाए गए सवाल खेल गतिविधि के बारे में उनकी अज्ञानता दिखाता है। इन सभी शिकायतों का कारण शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता के पिता के बीच कैडर प्रतिद्वंद्विता है।

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