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दवा और उपकरणों की खरीद में घोटाले पर हाईकोर्ट ने ईडी और विजिलेंस से मांगा जवाब

हाईकोर्ट को बताया गया था कि हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में हुए दवा खरीद घोटाले के मामले की एक आरटीआई के हवाले से 2018 में दुष्यंत चौटाला ने इस घोटाले की सीबीआई जांच और कैग से आडिट कराने की मांग की थी।

दवा और उपकरणों की खरीद में घोटाले पर हाईकोर्ट ने ईडी और विजिलेंस से मांगा जवाब
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हरियाणा हाईकोर्ट

हरियाणा के स्वाथ्य विभाग में दवाओं और उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले की ईडी से जांच करवाए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने अब ईडी और विजिलेंस ब्यूरो को नोटिस जारी कर जवाब दिए जाने के आदेश दिए हैं।

चीफ जस्टिस रवि शंकर झा एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने यह नाटिस के आदेश इस मामले को लेकर जगविंदर सिंह कुल्हरिया द्वारा एवोकेट प्रदीप रापड़िया के जरिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं। याचिकाकर्ता ने पहले इसी मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। तब जस्टिस ऋतू बाहरी की खंडपीठ ने मामले को बेहद गंभीर और व्यापक जनहित का मामला मानते हुए याचिका पर जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई करने के आदेश देते हुए इस याचिका को चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष भेज दिया था। मंगलवार को चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए अब विजिलेंस ब्यूरो सहित ईडी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मांग को लेकर दायर याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में हुए दवा खरीद घोटाले के मामले की एक आरटीआई के हवाले से 2018 में दुष्यंत चौटाला ने इस घोटाले की सीबीआई जांच और कैग से आडिट कराने की मांग की थी। इस आरटीआई के अनुसार तीन वर्ष की अवधि में राज्य के सरकारी अस्पतालों में करोड़ रुपये की दवाएं और मेडिकल उपकरण खरीदे गए हैैं। जोकि बेहद ही महंगे दामों में ख़रीदे गए थे, याचिकाकर्ता ने कहा कि अब दुष्यंत चौटाला प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद मामले को भूल गए हैं और कार्यवाही की कोई मांग नहीं की।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया है कि हिसार की एक दवा कंपनी जिस अड्रेस पर दर्ज है वहां फार्म की जगह एक धोबी बैठा है। हिसार और फतेहाबाद के सामान्य हस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों सप्लाई करने वाली फर्म का मालिक नकली सिक्के बनाने के आरोप में तिहाड़ जेल में था। लेकिन उसने जेल से ही टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया बल्कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मी ने उसके झूठे हस्ताक्षर किए।

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