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High Court ने चलाया हथौड़ा, छात्रा को ऑनलाइन पढ़ाई मुहैया करवाएगा निजी स्कूल

पतराम गेट वासी एक व्यक्ति ने अपनी बेटी को नौंवी कक्षा Ninth grade में होने पर स्कूल द्वारा नियम 134ए के तहत अगली कक्षा में प्रवेश देने की गुजारिश की थी लेकिन स्कूल संचालक ने पहले पूरी एडमिशन व अन्य फंड जमा कराने की कही।

High Court ने चलाया हथौड़ा, छात्रा को ऑनलाइन पढ़ाई मुहैया करवाएगा निजी स्कूल

हरिभूमि न्यूज.भिवानी।

निजी स्कूल द्वारा एक छात्रा के अभिभावक से एडमिशन फीस (Admission fee) सहित अन्य फंड मांगना इतना महंगा पड़ गया कि अब स्कूल को ऑनलाइन पढ़ाई सहित अन्य सुविधाएं अपनी ओर से छात्रा को उपलब्ध करवानी होगी। केस की सुनवाई करते हाईकोर्ट (High Court) ने निजी स्कूल प्रशासन को सख्त हिदायतें दी है कि वे भविष्य में पीड़ित छात्रा को पढाई से संबंधित हर सुविधा उपलब्ध करवाएगा।

जानकारी के मुताबिक पतराम गेट वासी एक व्यक्ति ने अपनी बेटी को नौंवी कक्षा में होने पर स्कूल द्वारा नियम 134ए के तहत अगली कक्षा में प्रवेश देने की गुजारिश की थी लेकिन स्कूल संचालक ने पहले पूरी एडमिशन व अन्य फंड जमा कराने की कही। उसके बाद पीडि़त पिता ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में केस डाला था। इसी मामले में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बीएस वालिया ने 25 जून को पहली सुनवाई करते हुए निजी स्कूल को नोटिस जारी करते हुए लड़की की ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखे जाने व स्कूल द्वारा अन्य सभी प्रकार की गतिविधियां घर बैठे कराए जाने के आदेश दिए।

पड़ाव मोहल्ला वासी ने बताया कि उसने बेटी का 2015-16 में नियम 134ए के तहत एक निजी स्कूल में चौथी कक्षा में दाखिला कराया था। स्कूल ने 26 मार्च 2015 को बीईओ कार्यालय में सीबीएसई बोर्ड के तहत रिक्त सीटें नियम 134ए के तहत दर्शायी थी। इसी के तहत उसकी बेटी को अब तक प्रत्येक कक्षा में अव्वल श्रेणी से उत्तीर्ण किए जाने पर सीबीएसई बोर्ड का ही सर्टीफिकेट दिया जा रहा है। अब उसकी बेटी नौंवी में दाखिल करने पर एडमिशन फीस सहित अन्य सभी फंड मांगे जा रहे हैं,जबकि उसकी बेटी को सीबीएसई बोर्ड में 12वीं तक मुफ्त पढ़ाई कराए जाने का प्रावधान है।

बच्चे की पढ़ाई नहीं की जा सकती बाधित : परमार

स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि हरियाणा एजुकेशन एक्ट 2003 के नियम 134ए के तहत गरीब बच्चों की मुफ्त पढ़ाई का प्रावधान किया हुआ है, जबकि एक अप्रैल 2015 को प्रदेश में गरीब बच्चों को नियम 134ए के तहत मुफ्त शिक्षा का अधिकार मिला हुआ है। इस बच्ची का स्कूल द्वारा बीईओ को दी गई रिक्त सीट व विभाग द्वारा अपनाई गई दाखिला प्रक्रिया के तहत हुआ है। निजी स्कूल अचानक अगली कक्षा में प्रवेश से पहले इसी के साथ निजी स्कूल बच्चों के अभिभावकों से एक एग्रीमेंट भी साइन करा रहा है, जिसमें दर्शाया गया है कि स्कूल में कंप्यूटर,स्मार्ट क्लास व अन्य गतिविधियों के लिए अलग से चार्ज मांगा गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि ये केपिटेशन फीस के दायरे में आता है जो कोई भी स्कूल नहीं ले सकता है।

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