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हरियाणा के किसान ने किया ऐसा अविष्कार, बिना ईंधन बना सकेंगे बिजली, पर्यावरण प्रदूषण पर भी लगेगी रोक

कैथल के किसान विज्ञानी लछमन सिंह ने एक ऐसा संयंत्र बनाने का दावा किया है जो बिना किसी ईंधन के बिजली पैदा करने में सक्षम होगा। यह संयंत्र लीवर के सिद्धांत पर काम करेगा। इसका नाम हरीहर हरियाणा रखा है।

हरियाणा के किसान ने किया ऐसा अविष्कार, बिना ईंधन बना सकेंगे बिजली, पर्यावरण प्रदूषण पर भी लगेगी रोक
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किसान विज्ञानी लछमन सिंह

सूरज सहारण. कैथल

बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण ( pollution ) से निपटने के लिए जहां पूरे देश के पर्यावरणविद जुटे हैं तो वहीं इसका समाधान कैथल के प्योदा रोड निवासी किसान विज्ञानी लछमन सिंह ने निकाल लिया है। लछमन सिंह ने एक ऐसा संयंत्र ( plant ) बनाने का दावा किया है जो बिना किसी ईंधन के बिजली ( Electricity ) पैदा करने में सक्षम होगा। यह संयंत्र लीवर के सिद्धांत पर काम करेगा। उन्होंने इसका नाम हरीहर हरियाणा रखा है। ऐसा नहीं कि लछमन सिंह ने मात्र इस संयंत्र की खोज की हो बल्कि लछमन सिंह के नाम तीन पेटेंट हैं तथा दो कॉपी राइट हैं।

गौरतलब है कि लछमन सिह ने 2007 में एक बिना ईंधन से चलने वाले संयंत्र का निर्माण किया था। इस संयंत्र से दो हार्स पावर की मोटर चलाई थी जिसकी सहायता से आटा पिसाई भी की गई थी। लछमन सिंह की ड्राइंग को जब 2008 में पटियाला विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरों ने जांच तो उन्होंने इसे सफल बताया था। उन्होंने उस समय पर उक्त ड्राइंग में ऐसे यंत्रों को नहीं लगाया था जो प्राकृतिक ऊर्जा के बल शक्ति को बढ़ा दे।

यूं काम करेगा संयंत्र

लछमन सिंह ने बताया कि इस यंत्र को लंबी लीवरों को नीचे से ऊपर एक मिनट के समय में गिराया जाएगा तो फिर वह लंबी लीवर उस गियर को चक्कर देंगी और उस गियर के एक चक्कर से 100 क्विंटल का बल पैदा होगा। इस प्रकार गियर बाक्स से साफट को जोड़ते हुए उसे लंबी साफट से जोड़ दिया जाएगा। इस प्रकार अधिक से अधिक चक्कर पैदा कर अंतिम में उसे जनरेटर से जोड़ दिया जाएगा। इस प्रकार एक ही समय में इससे पांच जरनेटरों को जोड़कर उनसे बिजली पैदा की जा सकेगी।

शुरुआती दौर में 15 लाख की होगी जरूरत

किसान लछमन सिंह की आर्थिक हालत बहुत कमजोर है जिस कारण वे इस संयंत्र को अपने स्तर पर तैयार नहीं कर सके लेकिन उनमें देशभक्ति की भावना हिलौरे मारती है। यही कारण है कि उन्होंने इस संयंत्र को किसी अन्य प्रदेश या देश के विज्ञानियों को नहीं दिया। उन्हाेंने बताया कि इस संयंत्र को शुरू करने के लिए शुरुआती दौर में 15 लाख रुपये की लागत आएगी।

ठुकरा चुके हैं करोड़ों के ऑफर

आर्थिक हालत कमजोर होने के बावजूद लछमन सिंह अपने आविष्कारों को हरियाणा व भारत के युवाओं को ही सौपना चाहते हैं। यही कारण है कि वे अब तक अपने पेटेंट व आविष्कारों के लिए करोड़ों रुपये की ऑफर ठुकरा चुके हैं। मात्र सातवीं तक शिक्षा प्राप्त कर चुके किसान विज्ञानी लछमन सिंह को उनकी आधुनिक खोज के कारण प्रधानमंत्री कार्यालय से भी प्रशस्ति पत्र मिल चुका है।

15 लाख रुपये में लगाकर तैयार कर सकते हैं छोटा संयंत्र

लछमन सिंह ने बताया कि उनके संयंत्र को लगवाने के लिए हजारों व्यापारी व बिजनेसमैन तैयार हैं लेकिन वे अपनी खोज को प्रदेश व देश के युवाओं को सौपना चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि कोई भी पांच प्रदेशों की सरकार उसे 15 लाख की आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ विज्ञानियों को प्रशिक्षण देने के लिए भेजे तो वह अपना संयंत्र लगाने को तैयार हैं। उसने यह बताया कि संयंत्र तैयार होने पर ही वे इसका पेटेंट भी करवाएंगे।

लछमन सिंह के नाम पेंटट व कॉपीराइट

2012 में नीलकंठ महादेव - बिना बिजली के पानी को प्यूरीफायर करने के लिए।

2016 में नीलकंठ महादेव - आरओ के अशुद्ध पानी को फिर से शुद्ध करना।

2010 सूर्ययंत्र - ठोस ईंधन को अधिक आक्सीजन देने के लिए ताकि प्रदूषण न हो।

2002- शिवनल - कम पॉवर की मोटर से अधिक गहराई से अधिक पावर की मोटर के समान भूमिगत पानी निकालना।

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