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Haryana Government के सॉफ्टवेयर ने खराब की किसानों की किस्मत, नहीं हो रही पेमेंट

सोहना मंडी में किसानों (Farmers) को 15 दिन से अधिक अपनी फसल बेचे हुए हो गया हैं। लेकिन अभी तक उन्हें पेमेंट (payment) नहीं मिल पाई है। इससे पहले भी किसानों ने अपनी आवाज उठाई थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। वहीं अधिकारियों (Officers) का इतना ही कहना है कि सॉफ्टवेयर में कुछ गड़बड़ी आई हुई है। उसे अपडेट किया जा रहा है।

Haryana Government के सॉफ्टवेयर ने खराब की किसानों की किस्मत, नहीं हो रही पेमेंट
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प्रतीकात्मक फोटो

गुरुग्राम। पूरे सीजन किसान (Farmer) मिट्टी में मिट्टी होकर भविष्य के सपने संजोता है। किसी को शादी तो किसी को अन्य कार्यक्रम करने होते हैं। वहीं त्योहारी सीजन होने के चलते अब लोगों के खर्चे खूब हो रहे हैं। ऐसे में वे किसान परेशान हैं, जिन्होंने पूरी मेहनत के साथ फसल (Crop) तैयार करके मंडी में बेची। लेकिन फसल बेचने के बदले उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा। पेमेंट रिलीज नहीं होने का कारण अधिकारी सॉफ्टवेयर में खराबी बता रहे हैं।

यहां सोहना मंडी में किसानों को 15 दिन से अधिक अपनी फसल बेचे हुए हो गया हैं। लेकिन अभी तक उन्हें पेमेंट नहीं मिल पाई है। इससे पहले भी किसानों ने अपनी आवाज उठाई थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अब अधिकारियों ने सुनी जरूर, लेकिन पेमेंट मिलने का गारंटी नहीं दे पाए। अधिकारियों का इतना ही कहना है कि सॉफ्टवेयर में कुछ गड़बड़ी आई हुई है। उसे अपडेट किया जा रहा है। इस कारण से पेमेंट का भुगतान करने में देरी हो रही है।

किसान रतिराम यादव, सूरज यादव, महेश शर्मा, नरू यादव, ने कहा कि एक तरफ तो सरकार किसानों को सुविधाएं देने के तमाम दावे कर रही है। बरोदा उप-चुनाव में भी किसानों के मुद्दे पक्ष और विपक्ष के लिए अहम हैं। वहां सरकार 3 अध्यादेश लागू करके किसानों की आय बढ़ाने के दावे कर रही है तो विपक्ष इसे किसानों के साथ छलावा करके पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का रास्ता बता रहा है। सरकार 3 अध्यादेश को तो प्रमुखता से उठा रही है, लेकिन वर्तमान में मंडियों में किसानों की हालत पर नजर नहीं डाली जा रही। किसानों को यहां फसल बेचने से लेकर पेमेंट तक में बहुत दिक्कत आ रही है। बेचने से पहले टोकन लेने के लिए मशक्कत और फिर बेचकर भी सुकून नहीं। क्योंकि पेमेंट का कुछ अता-पता नहीं। सरकार त्योहारों के सीजन में किसानों की सुध ले, ताकि वे त्योहार मना सकें।

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