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हरियाणा सरकार ने लाखों कर्मियों को दिया तोहफा, कैशलेस मिलेगा उपचार

8 फरवरी को जारी किए गए पत्र में डीजी हेल्थ सर्विसेज हरियाणा की ओर से कैशलेस मेडिकल सुविधा राज्य के सभी कर्मियों को उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। पत्र में सीएम की घोषणा का जिक्र भी किया गया है।

chief ninister manohar lal
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chief ninister manohar lal

योगेंद्र शर्मा : चंडीगढ़

हरियाणा सरकार ने सरकारी सेवाओं में कार्यरत लाखों कर्मियों को कैशलेस उपचार दिए जाने पर मुहर लगा दी है। इस आशय की घोषणा प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने की थी, इस योजना को जमीनी हकीकत में साकार करने को लेकर हरियाणा के गृह एवं सेहत मंत्री अनिल विज भी प्राथमिकता के साथ लागू करने के पक्षधर थे। सरकार द्वारा कर्मियों को तोहफा दिए जाने का कर्मचारी संगठन नेताओं और कर्मचारियों ने दिल खोलकर स्वागत किया है।

सूबे की मनोहर सरकार ने अपने इस फैसले के जरिये एक तीर से कईं निशाने साधने का काम किया है। हरिभूमि पहले भी कर्मियों को कैशलेस सुविधा दिए जाने का मामला अपने कईं अंकों में उठा चुका है। 8 फरवरी को जारी किए गए पत्र में डीजी हेल्थ सर्विसेज हरियाणा की ओर से कैशलेस मेडिकल सुविधा राज्य के सभी कर्मियों को उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। पत्र में सीएम की घोषणा का जिक्र भी किया गया है। पत्र में साफ किया गया है कि फाइनेंस कमेटी सी की ओर से कैशलेस सुविधा दिए जाने की सिफारिश की है। जिसमें सभी कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके डिपेंडेंट को सुविधा दिए जाने का फैसला बीती 18 दिसंबर 2020 को लिया गया था। एसीएस फाइनेंस और एसीएस हेल्थ, डीजीएचएस, पीएससीएम के अलावा सीईओ-एबीएचएचपीए इसको लेकर जल्द से जल्द क्रियान्वयन कराने का काम करेगी। इसके अलावा एनआईसी को सभी कर्मियों का ब्योरा तुरंत ही अपेडट करने के लिए कहा गया है।

वित्त विभाग 2020-2021 के बजट में करेगा प्रावधान

इस क्रम में सीएम की इस घोषणा को लेकर जहां 10 को होने वाली केबिनेट में मंथन होगा। वहीं दूसरी ओर इस बार के बजट सत्र के दौरान ही कर्मियों के कैशलेस उपचार को लेकर अ लग से बजट का प्रावधान कर दिया जाएगा। इसके अलावा केंद्र के एनजीओ क्रिड को भी लिखा गया है ताकि परिवार पहचान पत्र का प्रयोग किया जा सके। साथ ही इसमें कईं अन्य श्रेणियों को शामिल करने के लिए कहा गया है। जिसमें आयुष्मान भारत हरियाणा हेल्थ प्रोटेक्शन अथारिटी को भी लिखा गया है।

सरकारी कर्मचारी लंबे समय से कैशलेस स्कीम का इंतजार कर रहे हैं। उक्त सुविधा लंबे समय लंबे समय से लटके होने को लेकर मनोहरलाल सरकार पार्ट वन में भी मंत्री अनिल विज नाराजगी जाहिर करते हुए इस काम में तेजी लाने का निर्देश जारी कर चुके थे। इस बार भी विज ने कर्मियों को यह सुविधा दिए जाने की वकालत करते हुए सीएम की घोषणा पर जल्द से जल्द अमल करने के लिए कहा था।

तीन लाख से ऊपर हरियाणा के कर्मचारी

राज्यभर में तीन लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी और अफसर हैं। अब इस घोषणा के बाद में कर्मियों को देशभर के नामी-गिरामी अस्पतालों में इलाज कराने का मौका मिलेगा। दो दर्जन से ज्यादा निजी अस्पतालों को सूची में डाला गया है। आधुनिक अस्पतालों को जोड़ने (इंपनैलमेंट) कर दिया गया है। कर्मियों को सहूलियत देने की सोच के तहत ही इस तरह का फैसला हुआ था।

पहले कुछ इस तरह से व्यवस्था

अब से पहले कर्मियों को अपनी बीमारी के उपचार के बाद में बिल पेश करने पड़ते हैं, जिनका बाद में भुगतान होता है। कईं बार कर्मियों को एक टेबल से दूसरे टेबल पर धक्के खाने के बाद में खर्च की राशि में से आधी भी नहीं मिल पाती। हालांकि पीजीआई, सेक्टर 16 और 32 जैसे अस्पताल भी सूची में शामिल हैं। अगर कर्मचारी पुराने जिन अस्पतालों के साथ में इंपैनलमेंट हैं, उसमें उपचार कराए, तो भुगतान पीजीआई वाले रेटों का ही होता है, भले ही उसका बिल कितना भी क्यों नहीं हो?

कर्मियों के हितों को लेकर हमारी सरकार बेहद गंभीर

पूरे मामले में गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कहते हैं कि राज्य सरकार प्रदेश के लाखों कर्मियों के हितों को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। हम पहले ही दिन से कर्मियों को यह सुविधा दिए जाने को लेकर काम कर रहे थे। कर्मचारी हमारे लिए अहम हैं,. आने वाले समय में उनको ज्यादा से ज्यादा सुविधा और सहूलियत मिले इस दिशा में कई कदम उठा रहे हैं।

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