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दोबारा परिचालन के चार माह बाद भी आधी चल रहीं रोडवेज बसें

सवारियां बढ़ी तो सही लेकिन उतनी नहीं जितनी उम्मीद थी। यही वजह है कि अब दोबारा परिचालन को चार महीने से अधिक समय हो गया है लेकिन बसें आधी ही चल पा रही हैं। बहादुरगढ़ डिपो में लगभग 60 बसें हैं, इनमें से 30 से 32 बस ही चल पा रही हैं।

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बहादुरगढ़। शहर के बस अड्डे से निकलकर जाती रोडवेज बस।

हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़

कोरोना काल में प्रभावित हुई हरियाणा रोडवेज (Haryana Roadways) की सेवाएं अब भी पटरी पर आने के लिए संघर्ष कर रही हैं दोबारा परिचालन के चार महीने बीत जाने के बाद भी बहादुरगढ़ डिपो की लगभग आधी बसें ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। लंबे रूटों की बसों से तो यात्री (Traveler )लगभग दूरी बनाए हुए हैं।

दरअसल, कोरोना के चलते रोडवेज बसों का संचालन बंद कर दिया गया था। हालांकि लॉकडाउन में इमरजेंसी सेवाओं के लिए तो बसें चली लेकिन आमजन के लिए पूरी तरह से बंद रही। काफी दिनों के बाद अनलॉक लगने पर जून महीने की शुरुआत में आमजन के लिए रोडवेज की बसों का दोबारा परिचालन शुरू हुआ था। शुरुआती दिनों में आठ से दस बसें ही चल पाई, लेकिन अधिकारियों को उम्मीद थी कि धीरे-धीरे सवारियां बढ़ जाएंगी। सवारियां बढ़ी तो सही लेकिन उतनी नहीं जितनी उम्मीद थी। यही वजह है कि अब दोबारा परिचालन को चार महीने से अधिक समय हो गया है लेकिन बसें आधी ही चल पा रही हैं। बहादुरगढ़ डिपो में लगभग 60 बसें हैं, इनमें से 30 से 32 बस ही चल पा रही हैं।

रोहतक, झज्जर, बेरी, सोनीपत व पानीपत आदि रूटों की बसों को ही पर्याप्त यात्री मिल रहे हैं, लंबे रूटों के यात्री बेहद कम है। छोटे रूटों के लिए भी रोडवेज कर्मियों को निजी बस चालक-परिचालकों से संघर्ष करना पड़ रहा है। अक्सर सवारियों को लेकर निजी और रोडवेज बसों के कर्मचारी एक-दूसरे से उलझे रहते हैं।

यात्रियों की संख्या के हिसाब से बसें चलाई जा रही हैं

उधर, डिपो के ड्यूटी इंस्पेक्टर सतबीर सिंह ने कहा कि यात्रियों की संख्या के हिसाब से बसें चलाई जा रही हैं। धीरे-धीरे व्यवस्था पटरी पर लौट रही है। उम्मीद है आगामी कुछ समय में सभी बसें सड़कों पर दौड़ पाएंगी।

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