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किसान आंदोलन : सरकार और गर्मी से दो-दो हाथ करने के लिए बंदोबस्त में जुटे आंदोलनकारी किसान

पिछले 100 दिनों में मौसम भी बदले, हालात भी बदले, लेकिन जो नहीं बदला, वो है किसानों का हौसला। किसान आंदोलन के दौरान हजारों किसान 27 नवंबर की सुबह टीकरी बॉर्डर पर पहुंच गए थे। तब से लेकर अब तक इस आंदोलन में आधी आबादी ने भी बड़ा योगदान किया।

किसान आंदोलन : सरकार और गर्मी से दो-दो हाथ करने के लिए बंदोबस्त में जुटे आंदोलनकारी किसान
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बहादुरगढ़ : किसानों द्वारा बाईपास पर लगाए गए विशाल टेंट।

हरिभूमि न्यूज : बहादुरगढ़

केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए दो नए कृषि कानूनों और तीसरे कानून में संशोधन के साथ ही किसान सड़कों पर हैं। पंजाब से शुरू हुए इस आंदोलन में हरियाणा और पश्चिम उत्तरप्रदेश के किसान भी शिद्दत से जुड़ चुके हैं। किसानों ने नवंबर में दिल्ली कूच का ऐलान किया। सिंघु बॉर्डर पर 26 नवंबर व टीकरी बॉर्डर पर 27 नवंबर को किसानों का दिल्ली पुलिस से टकराव हुआ और इसके बाद से ही हजारों किसान यहां पर डटे हुए हैं। पिछले 100 दिनों में मौसम भी बदले, हालात भी बदले, लेकिन जो नहीं बदला, वो है किसानों का हौसला। किसान आज भी उसी जज्बे के साथ गर्मी और सरकार से दो-दो हाथ करने के बंदोबस्त में जुटे हैं।

किसान आंदोलन के दौरान हजारों किसान 27 नवंबर की सुबह टीकरी बॉर्डर पर पहुंच गए थे। तब से लेकर अब तक इस आंदोलन में आधी आबादी ने भी बड़ा योगदान किया। पंजाब की किसान नेत्री जसबीर कौर से लेकर हिसार की सुदेश गोयत और बहादुरगढ़ की राखी शौकीन तक ने अपने सामर्थ्य अनुसार इसमें योगदान दिया। हजारों महिलाएं प्रतिदिन भोजन-बर्तन, कपड़े-सफाई आदि के अलावा धरने में भी सहभागिता दर्ज करवा रही हैं।

दिखा युवा जोश का दम

किसान आंदोलन में बीते 100 दिनों में युवाओं ने भी पूरे जोश व दमखम के साथ भाग लिया। युवा किसानों ने कंपकंपाती ठंड में भी प्रतिदिन टीकरी बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस के समक्ष अर्धनग्न प्रदर्शन कर सरकार को चेताने का प्रयास किया। युवाओं ने ट्रैक्टर परेड से लेकर अनेक गतिविधियों में पूरी सक्रियता दिखाई। अब छात्र पंचायत से लेकर युवा सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।

टोल फ्री और ट्रैक्टर परेड

किसान आंदोलन के बीच बीते दस दिनों में अनेक गतिविधियों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। एक तरफ जहां दिसंबर के अंत में किसानों ने इलाके के सभी टोल फ्री करवाते हुए वाहन चालकों को आर्थिक तौहफा दिया। वहीं दूसरी तरफ पहले 7 जनवरी को केएमपी पर और फिर 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के माध्यम से देश ही नहीं दुनिया के लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

पर्यावरण-स्वच्छता का संदेश

किसानों ने बीते 100 दिनों मंे जहां एक तरफ सरकार समर्थकों के जहरीले कटाक्षों का सामना किया, वहीं अपने व्यवहार से लोगों को सेवा-सद्भाव की सीख भी दी। पूरे आंदोलन के दौरान जहां चाय से लेकर भोजन के लंगर लगाए गए। वहीं स्वयं सफाई कर किसानों ने उदाहरण पेश किया। इसके अलावा सालों से उजड़ी पड़ी ग्रीन बेल्ट को हरा-भरा बनाकर पर्यावरण प्रहरी के रूप में अपनी पहचान को साबित किया।

ट्रॉलियों से अब टैंटों तक

किसानों ने जहां ठंड का मौसम ट्रॉलियों व बरसात को तिरपाल के सहारे झेल लिया। वहीं अब गर्मी की आमद के साथ ही किसानों ने इससे बचने के लिए अतिरिक्त इंतजाम शुरू कर दिए हैं। बाईपास पर एक तरफ जहां बड़े-हवादार टैंट लगाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ दरख्तों के नीचे भी बसेरे आबाद किए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि तीनों कानून रद होने तक वे घर वापिस नहीं जाएंगे।

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