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छात्राओं को बसों का इंतजार : 9 पिंक बसें मिली थी, 4 झज्जर को दे दी बाकी 5 बसें एंबुलेंस बनी तीन माह से खड़ी

क सितंबर से चौथी व पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोले गए। फिर 20 सितंबर से पहली से तीसरी कक्षा तक के बच्चों को भी स्कूल में पढ़ाया जाने लगा है। इसी दौरान सरकारी कॉलेजों के अलावा पॉलिटेक्निक, आईटीआई समेत निजी शिक्षण संस्थाएं खोले गए। ऐसे में इन शिक्षण संस्थानों में छात्राओं का आवागमन निरंतर जारी है। छात्राएं इन दिनों पिंक मिनी बस के चलने का इंतजार कर रही है।

छात्राओं को बसों का इंतजार :  9 पिंक बसें मिली थी, 4 झज्जर को दे दी बाकी 5 बसें एंबुलेंस बनी तीन माह से खड़ी
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नारनौल : रोडवेज वर्कशॉप में खड़ी पिंक मिनी बस। फोटो:हरिभूमि

हरिभूमि न्यूजनारनौल

जिला में दूरदराज ग्रामीण क्षेत्र से स्कूल, कॉलेज व अन्य शिक्षण संस्थाओं में घर से आवागमन करने वाली छात्राओं की सहुलियत के लिए रोडवेज विभाग ने प्रदेश में 150 मिनी पिंक बसें खरीदी थी। नारनौल डिपो के हिस्से नौ बस हिस्से आई। इनमें से कोरोना महामारी के बीच चार बस झज्जर को दे दी गई। बाकी पांच बसों को कोरोना महामारी की पहली लहर में स्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया। बस में सवार होकर गांवों में स्वास्थ्य टीम जाती थी। दूसरी लहर में इन पांच बसों को एंबुलेंस का रूप दे दिया गया। मई-2020 के अंतिम दिनों के बाद कोरोना संक्रमण लहर धीमी होने शुरू हुई और फिर धीरे-धीरे स्कूल व कॉलेज खुलने लगे। इस समय कॉलेज व स्कूल सहित कोचिंग सेंटर सब खुल चुके है। बावजूद अभी तक छात्राओं की सुविधा के लिए लाई गई पिंक मिनी बस कई माह से रोडवेज कार्यशाला में ही खड़ी है। ऐसे में छात्राएं अब पिंक बस में सफर करने के इंतजार में है।

फरवरी-2020 में नारनौल डिपो को नौ पिंक मिनी बस मिली। एक बस में 32 सीट है। इन पिंक बसों में जीपीएस व स्पीड गवर्नर लगे है। साथ ही सीसीटीवी कैमरा, इमरजेंसी डोर, अलार्म, फायर सेफ्टी सुरक्षा यंत्र भी लगे है। नई बस के इंश्योरेंस सहित अन्य कागजी कार्रवाई को पूरा किया गया, उसी वक्त कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन लग गया। इस कारण स्कूल, कॉलेज व अन्य शिक्षण संस्था बंद हो गई। इस वजह से इन बसों को ग्रामीण रूटों पर नहीं चलाया गया। ऑनलाइन ही पढ़ाई का सिलसिला लॉकडाउन में चला। इस दौरान कोरोना महामारी के फैलाव होता देख स्वास्थ्य विभाग ने इन बसों को अपने अंडर लिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम इन बसों में सवार होकर ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के कार्य में जुटी रही। फिर कोरोना की दूसरी लहर शुरू हुई तो मई-2021 के बीच इन पिंक बसों की सीटें निकाल कर एंबुलेंस में बदल दिया। जुलाई माह के बाद कोरोना महामारी का पीक समय निकल गया। तब एंबुलेंस बनी इन मिनी पिंक बसों को वापस रोडवेज वर्कशॉप में लाया गया, जहां ये अब तक धूल फांक रही है।

कोरोना महामारी की दूसरी लहर गुजर जाने के बाद प्रदेश सरकार ने कक्षा नौंवीं से 12वीं के लिए 17 जुलाई, कक्षा छठीं से आठवीं तक के विद्यार्थियों को ऑफलाइन क्लासेस लेने के लिए स्कूल में 23 जुलाई से शुरूआत की। एक सितंबर से चौथी व पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोले गए। फिर 20 सितंबर से पहली से तीसरी कक्षा तक के बच्चों को भी स्कूल में पढ़ाया जाने लगा है। इसी दौरान सरकारी कॉलेजों के अलावा पॉलिटेक्निक, आईटीआई समेत निजी शिक्षण संस्थाएं खोले गए। ऐसे में इन शिक्षण संस्थानों में छात्राओं का आवागमन निरंतर जारी है। छात्राएं इन दिनों पिंक मिनी बस के चलने का इंतजार कर रही है।

क्या कहते है जीएम

रोडवेज जीएम नवीन शर्मा ने बताया कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में पिंक मिनी बसों को एंबुलेंस में तब्दील किया था। तीसरी लहर आने की संभावनाओं के मद्देनजर अभी एंबुलेंस के रूप में इन्हें रखने के आदेश है। उच्चाधिकारियों की ओर से जब एंबुलेंस हटा सीट लगा बस को चलाने के निर्देश मिलेंगे तो आगामी कार्रवाई की जाएगी।

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