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Ghevar : मौसम सुहावना होते ही घेवर बनना शुरू, लाजवाब स्वाद की वजह से पूरे भारत में मशहूर

घेवर की सबसे अधिक डिमांड सावन में ही रहती है। बाजार की मांग पूरी करने के लिए हलवाई कई दिन पहले से काम शुरू कर देते हैं। हालांकि इस मिठाई का स्वाद बरसात में ही सबसे ज्यादा आता है।

Ghevar : मौसम सुहावना होते ही घेवर बनना शुरू, लाजवाब स्वाद की वजह से पूरे भारत में मशहूर
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बहादुरगढ़ : सावन से पहले ही घेवर बनाने में जुटे हलवाई।

हरिभूमि न्यूज : बहादुरगढ़

सावन का मौसम आने वाला हो और घेवर की मिठास न घुले तो फिर बात ही क्या। घेवर सावन मास की विशेष मिठाई है। हरियाणा-राजस्थान की यह विशेष मिठाई अपने लाजवाब स्वाद की वजह से पूरे भारत में मशहूर है। हालांकि घेवर की सबसे अधिक डिमांड सावन में ही रहती है। बाजार की मांग पूरी करने के लिए हलवाई कई दिन पहले से काम शुरू कर देते हैं। हालांकि इस मिठाई का स्वाद बरसात में ही सबसे ज्यादा आता है।

बता दें कि इस बार रक्षाबंधन 22 अगस्त को है। सावन के महीने में पड़ने वाले इस त्योहार के दौरान मिठाइयों में सबसे ज्यादा घेवर और फैनी की मांग होती है। इसके लिए शहर में तैयारियां अभी से शुरू हो गई है। मानसून बरसात शुरू होते ही नगर के प्रतिष्ठित मिष्ठान विक्रेताओं ने घेवर व फैनी बनाना शुरू कर दिया है। एक प्रतिष्ठान मालिक जयभगवान ने बताया कि जितनी अच्छी बरसात और नमी होगी, घेवर और फैनी भी उतनी ही अच्छी बनेगी। नमी के मौसम में ये दोनों चीजें उतनी ही मुलायम और स्वादिष्ट हो जाती हैं। इसके अलावा जितनी भी मिठाइयां होती हैं, उनमें नमी के चलते चिपचिपापन आ जाता है।

हलवाई हरिकेष ने बताया कि समय के साथ घेवर भी कई तरह के बनने लगे हैं। पहले तो घेवर मैदे में पानी डालकर घोल तैयार करके बनाया जाता था। लेकिन अब मैदे के घोल बनाते समय पानी नहीं डाला जाता, उसमें दूध मिलाया जाता है। फिर उसे उसे बनाया जाता है। इसके अलावा केसरिया घेवर देसी घी और चीनी मिलाकर तैयार किया जाता है। केसरिया घेवर कई दिनों तक खराब नहीं होता। इसके अलावा एक मलाई घेवर बनाया जाता है, जिसमें खोए का प्रयोग किया जाता है। इन घेवरों में कई तरह के मेवा आदि का प्रयोग भी होता है।

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