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भतीजे अमर को बचाने गए फूफा गणेश ने भी गंवाए प्राण

निकलने का रास्ता नहीं मिला तो सीवर के अंदर मुंह डालकर खुद को बचाने का प्रयास किया लेकिन होनी को नहीं टाल सके और दोनों की जान चली गई। इस कांड ने पिछले साल हुए अग्निकांड के दर्द को ताजा कर दिया। फूफा-भतीजे की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

भतीजे अमर को बचाने गए फूफा गणेश ने भी गंवाए प्राण
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बहादुरगढ़। पोस्टमार्टम के दौरान विलाप करती गणेश की पत्नी व बच्चे।

बहादुरगढ़। आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र (एमआईई पार्ट-बी) में हुए अग्निकांड में फूफा-भतीजे की दम घुटने व झुलसने से मौत हो गई। खुद को बचाने के लिए दोनों खूब छटपटाए।

निकलने का रास्ता नहीं मिला तो सीवर के अंदर मुंह डालकर खुद को बचाने का प्रयास किया लेकिन होनी को नहीं टाल सके और दोनों की जान चली गई। इस कांड ने पिछले साल हुए अग्निकांड के दर्द को ताजा कर दिया। फूफा-भतीजे की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

मृतकों की पहचान करीब 27 वर्षीय गणेश और 20 वर्षीय अमर के रूप में हुई है। दोनों बिहार के अररिया जिले के रहने वाले थे। दोनों रिश्तेदार थे। गणेश, अमर का फू फा लगता था। जानकारी के अनुसार, करीब छह महीने पहले काम की तलाश में गणेश अपने परिवार सहित बहादुरगढ़ आया था। तब अमर भी उसके साथ यहां आ गया। एमआईई स्थित 1625 नंबर में ये काम करने लगे।

इन दिनों दोनों की ड्यूटी नाइट शिफ्ट में चल रही थी। इसी बीच फैक्ट्री मंे आग लग गई। दिन की शिफ्ट में काम कर रहे अन्य कर्मचारी भागकर बाहर निकले। शोरशराबा हुआ तो गणेश ने किसी तरह अपनी पत्नी हिना को फैक्ट्री से बाहर निकाला। अमर दूसरे हिस्से में था। अमर को बाहर न पाकर गणेश तुरंत उसे बचाने दोबारा फैक्ट्री में घुस गया। तब तक आग भड़क चुकी थी।

गणेश अपने भतीजे अमर तक पहुंच तो गया लेकिन दोनों को वहां से निकलने का रास्ता नहीं मिला। आग और धुआं फैलने के कारण दोनों का दम घुट रहा था। सांस लेना दूभर हुआ तो दोनों छटपटाने लगे।

उन्हें नजदीक ही एक सीवर दिखा तो उसका ढक्कन खोल दिया। दोनों ने अपना मुंह सीवर के अंदर डाल दिया, ताकि दम घुटने से बच सके। लेकिन यह प्रयास जान बचाने के लिए नाकाफी रहा। उधर, फैक्ट्री के बाहर खड़ी हिना अपने पति गणेश व भतीजे अमर के बाहर निकलने के इंतजार मंे रातभर बिलखती रही। शनिवार की सुबह जब आग नियंत्रण में आई तो दमकल कर्मियों ने सर्च अभियान चलाया। दोनों मृत अवस्था में मिले।

दोनों के शव देखकर हिना फफक कर रो पड़ी। अमर अविवाहित था और तीन बहनों में इकलौता भाई था। वहीं गणेश चार भाईयों में मंझला था। अमर की मौत से जहां गांव में रह रहे बुजुर्ग माता-पिता का सहारा छिन गया है, वहीं गणेश की मौत से दो बच्चों (करीब दस वर्षीय निक्कू व करीब आठ वर्षीय टिंकू) के सिर से पिता का साया उठ गया है। जब हादसा हुआ तो इत्तफाक से ये दोनों बच्चे ट्यूशन पढ़ने गए हुए थे। दोनों के पोषण की जिम्मेदारी अब हिना के कंधों पर आ गई है।

नागरिक अस्पताल में मौजूद श्रमिकों ने बताया कि यहां अधिकांश फैक्ट्रियां तय मानकों के आधार पर नहीं बनाई गई हैं। इसी वजह से श्रमिकों की जान चली जाती है। यदि फैक्ट्री बनाने में मानकों का ध्यान रखा जाता तो शायद अमर व गणेश की जान न जाती।



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