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रोहतक शुगर मिल रिकवरी में चौथे व पेराई में दूसरे स्थान पर

रोहतक इकाई का शुक्रवार को रिकवरी रेट 9.70 दर्ज किया गया। जबकि पूरे सीजन का अभी तक यह रेट 9.05 रहा है। फैक्ट्री अभी तक 26 लाख 36 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुकी है। उम्मीद यह है कि जब तक तक सीजन पूरा होगा 55-56 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी होगी।

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शुगर मिल  

हरिभूमि न्यूज : राेहतक

प्रदेश की शुगर मिल बेशक लगातार घाटे में चल रही हों। लेकिन गन्ने की पेराई को लेकर मिलों में हर साल मुकाबला बना रहता है। चालू पेराई सत्र में रोहतक शुगर मिल गन्ने से रिकवरी करने में प्रदेश में शाहबाद, करनाल और पलवल के बाद चौथे स्थान पर है। गन्ने की पेराई में शाहबाद टॉप पर और रोहतक दूसरे स्थान पर है। रोहतक इकाई का शुक्रवार को रिकवरी रेट 9.70 दर्ज किया गया। जबकि पूरे सीजन का अभी तक यह रेट 9.05 रहा है। फैक्ट्री अभी तक 26 लाख 36 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुकी है। उम्मीद यह है कि जब तक तक सीजन पूरा होगा 55-56 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी होगी।

मिल का पेराई सत्र गत 7 नवम्बर को शुरू हुआ था। शुरुआती दिनों में गन्ने से रिकवरी काफी कम होती है। बताया जा रहा है कि 7 प्रतिशत से कुछ अधिक रिकवरी रेट था। लेकिन कुशल प्रबंधन के चलते इकाई अच्छी रिकवरी कर रही है। प्रबंधन का कहना है कि आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी होगी। क्योंकि अब गन्ने की पकाई सही हो गई है। जिससे शुगर की मात्रा बढ़ गई है। प्रबंधन ने 60 लाख क्विंटल गन्ने की क्रैशिंग करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। बीते पेराई सत्रों की बजाय इस बार 20-25 दिन पहला सत्र शुरू हुआ है। इसका लाभ किसानों को मिला। जिन किसानों ने गन्ने की अगेती किस्में तैयार की थी, उन्होंने मिल में गन्ना डालकर गेहूं की बिजाई की।

मई में संपन्न होगा

वर्ष 2019-20 का पेराई सत्र नवंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू करवाया गया था। जबकि 2018-19 में यह कार्य दिसम्बर के पहले सप्ताह में प्रारम्भ हुआ था, लेकिन इस बार नवम्बर के पहले सप्ताह में ही शुरू करवा दिया गया। सत्र देरी से शुरू होने का सीधे-सीधे असर किसानों पर पड़ता है। सत्र जितना देरी से शुरू होगा, संपन्न भी उसी हिसाब से होगा। अगर सत्र लेट संपन्न होता है तो किसानों काे गन्ना मिल में लाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि अप्रैल के पहले सप्ताह में रबी फसलों की कटाई-कढ़ाई शुरू हो जाती है। उस समय फसल की सफाई के लिए श्रमिक मिलने मुश्किल हो जाते हैं। वैसे बताया जा रहा है कि गन्ने की मात्रा इस बार ज्यादा होने की वजह से पेराई का कार्य मई में जाकर पूरा होगा।

35 हजार क्विंटल की क्षमता

मिल प्रबंधन के मुताबिक फैक्ट्री की प्रतिदिन क्रैशिंग क्षमता 35 हजार क्विंटल है। सत्र की शुरुआत में क्षमता कम रखी जाती है। क्योंकि शुरुआती दिनों में इकाई के पास क्षमता के हिसाब से गन्ना नहीं पहुंच पाता है। जब इकाई को रोहतक से गांव भाली आनंदपुर शिफ्ट किया गया था तो दो-तीन साल तक नियमित रूप से ब्रेक डाउन की समस्या पैदा हो गई थी। लेकिन मिल के कुशल तकनीकी विंग ने इस समस्या को पर पार पाया। और अब ब्रेक डाउन की दिक्कत कभी-कभार ही होती है।

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