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नारनौल में सांडों की लड़ाई में चार महिलाएं व दो बच्चे घायल

नारनौल में पिछले कुछ महीनों से शहर में आवारा सांड व गोवंश आम लोगों पर मौत के साये की तरह मंडरा रहे हैं। मुख्य सड़कों के अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों व बाजारों में आए दिन लड़ने वाले ये सांड आम लोगों के साथ-साथ दुकानदारों के लिए जानमाल के दुश्मन बन चुके हैं।

नारनौल में सांडों की लड़ाई में चार महिलाएं व दो बच्चे घायल
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नारनौल : आवारा सांडों की लड़ाई में घायल महिला अस्पताल में उपचाराधीन। 

हरिभूमि न्यूज : नारनौल

शहर में काफी समय से आवारा सांडों व गोवंश का जमकर कहर बरप रहा है। परंतु प्रशासन व नगर परिषद के अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नहीं खुल रही है। रविवार शाम को दो सांडों की लड़ाई की चपेट में आने से चार महिलाएं व दो बच्चे घायल हो गए। जिन्हें उपचार के लिए नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बच्चों व दो महिलाओं को मामूली चोट होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि दो महिलाओं को गंभीर चोटे आने के कारण उपचार में लिए भर्ती रखा गया है। घायलों में बिमला पत्नी सुभाष चंद, शारदा पत्नी सुभाषचंद सैनी, मोना पुत्री बंशीधर व संतोष पत्नी मुंशीराम शामिल है। इनके अलावा दो बच्चे भी शामिल है। घायलों में शारदा व संतोष तथा बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि बिमला को गंभीर चोट होने के कारण अस्पताल में ही भर्ती रखा गया है।

यहां बता दें कि पिछले कुछ महीनों से शहर में आवारा सांड व गोवंश आम लोगों पर मौत के साये की तरह मंडरा रहे हैं। मुख्य सड़कों के अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों व बाजारों में आए दिन लड़ने वाले ये सांड आम लोगों के साथ-साथ दुकानदारों के लिए जानमाल के दुश्मन बन चुके हैं। ऐसा नहीं है कि इन मामलों से जिला प्रशासन व नगर परिषद अनभिज्ञ है।

सब कुछ प्रशासन व नप की नाक के तले होते हुए भी प्रशासन व नगर परिषद मूक दर्शक बनकर लोगों की मौत का मंजर देखने को बेताब है। इससे पहले भी आवारा सांडों की लड़ाई में नारनौल में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, इसके बाद भी जिला में किसी अधिकारी व संबंधित विभाग के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। सलामपुरा में आवारा सांडों की चपेट में घायल महिलाओं के बाद से लोगों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि शहर के गणमान्य व नेताओं को आमजन से जुड़ी इस समस्या की तरफ ध्यान क्यों नहीं जाता है। ये लोग जिला प्रशासन के समक्ष इस तरह की आमजन की जिंदगी से जुड़ी समस्याओं को क्यों नहीं उठाते हैं।

आवारा सांड यहां के नहीं राजस्थान के हैं: भारती

इस बारे में नगर परिषद की चेयरपर्सन भारती सैनी का कहना है कि शहर में घूूमने वाले आवारा सांड व गोवंश राजस्थान व आसपास के लोगों द्वारा छोडे़ गए हैं। शहर के आवारा गोवंश को नगर परिषद की नंदी गोशाला में रखा गया है। नप समय-समय पर इनको पकड़ने का अभियान चलाती है। अब जो बाहर से छोड़े गए आवारा हिंसक पशु शहर में घूम रहे हैं उनको भी पकड़कर नंदी गोशाला व अन्य गोशालाओं में रखा जाएगा।

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