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रोहतक: वीरेंद्र हत्याकांड मामले में चार गिरफ्तार, सात पुलिसकर्मी सस्पेंड

आरोपितों ने रोहतक कोर्ट परिसर से शुक्रवार सुबह वीरेंद्र का अपहरण कर लिया था। जिसके बाद टिटौली के पास ले जाकर उसकी हत्या कर दी गई। सीआईए वन ने इस मामले में चार आरोपितों राजकुमार, सुनील धर्मवीर और नन्हा को गिरफ्तार कर लिया है।

डीएसपी गोरखपाल राणा ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए
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डीएसपी गोरखपाल राणा ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए

हरिभूमि न्यूज : रोहतक

सीआईए वन ने कोर्ट परिसर से अपहरण और हत्या (Kidnapping and murder) करने के मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपितों को कोर्ट में पेश कर रिमांड (Remand) पर लिया जाएगा।

डीएसपी गोरखपाल राणा ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि आरोपितों ने कोर्ट परिसर से शुक्रवार सुबह वीरेंद्र का अपहरण कर लिया था। जिसके बाद टिटौली के पास ले जाकर उसकी हत्या कर दी गई। सीआईए वन ने इस मामले में चार आरोपितों राजकुमार, सुनील धर्मवीर और नन्हा को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपितों ने प्लाट के झगड़े में हत्या की थी। वहीं लापरवाह पुलिस कर्मियों पर गाज गिरी है। मामले में सात पुलिसकर्मी लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किए गए हैं। जिनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

वहीं पूरे मामले में जांच की गई कि पुलिस की लापरवाही किस स्तर पर थी। सामने आया कि जिस वक्त बदमाश कोर्ट से वीरेंद्र का अपहरण कर रहे थे तो तीन पुलिस वाले गेट पर ही खड़े सबकुछ देख रहे थे। बदमाशों ने उन्हें बताया कि वीरेंद्र को चोट लगी है, इसलिए उसे ले जा रहे हैं। डीएसपी सज्जन कुमार ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है और कार्रवाई की संस्तुति भी कर दी है। गार्द इंचार्ज समेत तीनों पुलिस कर्मियों की लापरवाही सामने आई है। पुलिस कर्मी तुरंत एक्टिव हो जाते तो बड़ी वारदात को रोका जा सकता था।

बता दें कि खेड़ी महम का रहने वाला वीरेंद्र बर्खास्त पुलिस कर्मचारी था। वह झगड़े के एक मामले में शुक्रवार को अग्रिम जमानत लेने के लिए कोर्ट में आया था। सुबह करीब 9.45 बजे जब वह कोर्ट परिसर में कैंटीन पर बैठा था तो 6-7 बदमाश उसके पास आए और मारपीट करते हुए उसका अपहरण करके ले गए। जिस वक्त अपहरण किया जा रहा था तो पीछे वाले गेट के पास कोर्ट के दरवाजे पर पुलिस कर्मी भी तैनात थे। उन्हीं के सामने अपहरण किया गया। यह भी सामने आया है कि पुलिस कर्मियों ने बदमाशों से पूछा भी था, लेकिन उन्होंने यह कहकर पुलिसवालों को बरगला दिया कि वीरेंद्र को चोट लगी है। अपहरण के बाद करीब 12.30 बजे वीरेंद्र का शव जींद रोड पर हिसार की ओर जाने वाले रास्ते पर बने पुल के नीचे मिला। उसकी हत्या करके यहां फेंक दिया गया था। जिस वक्त वारदात हुई उस समय मुख्यमंत्री मनोहर लाल शहर में ही थे। यह भी सामने आया है कि जिस चौक से होकर बदमाश गुजरे उस चौक पर भारी पुलिस बल सीएम की सुरक्षा में तैनात था। बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए थानों की पुलिस के अलावा सीआईए भी लगी हुई थी।

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