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शर्मनाक : पिता नहीं भर सका बिल तो अस्पताल ने नवजात बच्चों को देने से किया मना, सीएम विंडो पर भेजी शिकायत

पीड़ित रवींद्र ने बताया कि उसने 77800 रुपये अस्पताल में जमा करा दिए, लेकिन इसके बावजूद भी उसके दोनों जुड़वां बच्चों को उसे नहीं सौंपा गया। रवींद्र का आरोप है कि चिकित्सक उसके दोनों जुड़वां बच्चों को अस्पताल में रखे हुए हैं और उस पर बकाया राशि भुगतान का नाजायज दबाव बना रहा है।

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नवजात शिशु (प्रतीकात्मक फोटो)

हरिभूमि न्यूज.भिवानी

शहर के निजी अस्पताल संचालक पर गांव डुडीवाला निवासी रवींद्र सिंह ने अपने दो नवजात जुड़वा बच्चों को अस्पताल में जबरन रखने का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर पीडि़त ने उपायुक्त व सीएम विंडों पर शिकायत भेजी है।

पीडि़त रवींंद्र ने बताया कि वह अपनी पत्नी सीमा देवी को नसिंर्ग होम में अल्ट्रासाउंड के लिए लेकर आया था। लेकिन डॉक्टर ने कहा कि उसका ऑप्रेशन करना पड़ेगा। रवींद्र ने बताया कि उसने चिकित्सक से कहा था कि वह अपनी पत्नी को सरकारी अस्पताल में ले जा रहा है। मगर चिकित्सक ने कहा कि सरकारी अस्पताल में अच्छे डॉक्टर नहीं हैं, वहां उसकी मौत हो जाएगी। रवींद्र ने कहा कि वह अपने घरवालों को बुला लेता है। लेकिन इसी दरमियान डॉक्टर उसकी पत्नी को ऑप्रेशन थियेटर में ले गया और जबरन उसके कागजात पर भी हस्ताक्षर कराए गए। उसकी पत्नी सीमा का 30 सितंबर को ऑपरेशन कर दिया, इस दौरान उसनकी पत्नी को दो जुड़वा बच्चे एक लड़का और एक लड़की पैदा हुए और 4 अक्तूबर को उसकी पत्नी सीमा को अस्पताल से छुट्टी दे दी।

रवींद्र को चिकित्सक ने डेढ़ लाख रुपये का बिल थमा दिया,यह देखकर वह बोला कि वह बहुत गरीब आदमी हैं, इतनी रकम कहां से लाएगा। उसने पहले ही अपनी पत्नी को सरकारी अस्पताल में ले जाने के लिए बोला था, मगर यहीं पर उसका जबरन ऑप्रेशन कर दिया गया। रवींद्र ने बताया कि उसने 77800 रुपये अस्पताल में जमा करा दिए, लेकिन इसके बावजूद भी उसके दोनों जुड़वां बच्चों को उसे नहीं सौंपा गया। रवींद्र का आरोप है कि चिकित्सक उसके दोनों जुड़वां बच्चों को अस्पताल में रखे हुए हैं और उस पर बकाया राशि भुगतान का नाजायज दबाव बना रहा है।

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