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कपास की खेती : कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिशों पर कपास की बिजाई करें किसान

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज ने कहा कि गत वर्ष बीमारियों से प्रभावित हुई फसलों की जांच-पड़ताल से पता चला कि जिन किसानों ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा की गई सिफारिशों अनुसार फसल की बिजाई की थी उनकी फसलों में बीमारियों का असर अन्य फसलों की तुलना में बहुत कम था। इसलिए किसान वैज्ञानिकों की सिफारिशों अनुसार फसलों की बिजाई करें ताकि अधिक से अधिक फसल उत्पादन मिल सके।

कपास की खेती : कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिशों पर कपास की बिजाई करें किसान
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 कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज

हिसार : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज ने कहा कि किसान कपास की फसल की बिजाई विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई सिफारिशों अनुसार करें ताकि किसान को अपनी फसल की अच्छी पैदावार मिले तथा अधिक से अधिक मुनाफा हो।

उन्होंने कहा कि गत वर्ष बीमारियों से प्रभावित हुई फसलों की जांच-पड़ताल से पता चला कि जिन किसानों ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा की गई सिफारिशों अनुसार फसल की बिजाई की थी उनकी फसलों में बीमारियों का असर अन्य फसलों की तुलना में बहुत कम था। इसलिए किसान वैज्ञानिकों की सिफारिशों अनुसार फसलों की बिजाई करें ताकि अधिक से अधिक फसल उत्पादन मिल सके। समय-समय पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भी किसानों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से किसानों से संपर्क में रहेंगे। इसके लिए प्रदेश का कृषि विभाग एवं एचएयू के वैज्ञानिक संयुक्त रूप से एक जागरूकता अभियान भी जिलेवार चला रहे हैं।

28 अप्रैल तक चलाया जाएगा अभियान : अनुसंधान निदेशक

विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.के. सहरावत के अनुसार इस अभियान को सफल बनाने के लिए विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक टीम गठित कर दी गई है। यह अभियान 28 अपै्रल तक चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस टीम में विश्वविद्यालय की ओर से आनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग से सहायक वैज्ञानिक डॉ. सोमवीर, सहायक सस्य विज्ञानी डॉ. करमल सिंह, प्लांट पैथोलोजिस्ट डॉ. मनमोहन सिंह, कीट विज्ञानी डॉ. अनिल को शामिल किया गया है। टीम में एक मृदा वैज्ञानिक और प्लांट पैथोलोजिस्ट भी शामिल होंगे, जो मिट्टी की जांच आदि की जानकारी देंगे। इसके अलावा कृषि विभाग से जुड़े सभी अधिकारी, ए.टी.एम., बी.टी.एम. एवं कृषि सुपरवाइजर को इस प्रशिक्षण में प्रशिक्षित किया जाएगा। कपास अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. ओमेंद्र सांगवान ने बताया कि कपास अनुभाग के वैज्ञानिक लगातार कपास फसल में पैराविल्ट, पोषक तत्वों की कमी, सूखे के कारण कपास फसल के सूखने के कारणों का पता लगाएंगे और इनके निदान की संभावनाएं तलाशेंगे। इसके अलावा किसानों के खेतों में पांच या इससे अधिक स्थानों पर जहां हल्की मिट्टी है, प्रदर्शनी प्लांट लगाकर किसानों को जागरूक किया जाएगा।

किसानों को ये दिए जा रहे हैं वैज्ञानिक सुझाव

कपास अनुभाग के वैज्ञानिकों ने किसानों को बीटी कपास का सिफारिश किया हुआ बीज खरीदने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा जिले के कृषि विभाग के अधिकारियों व कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को कपास उत्पादन से संबंधित नवीनतम जानकारी प्रदान करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसान बीटी कपास के दो पैकेट प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई करें और कतार से कतार की व पौधे से पौधे की दूरी 100 सेंटीमीटर व 45 सेंटीमीटर अथवा 67.5 सेंटीमीटर या 60 सेंटीमीटर रखें। साथ ही किसान 15 मई तक बीटी कपास की बिजाई पूरी करते हुए इसमें प्रति एकड़ के हिसाब से एक बैग यूरिया, एक बैग डी.ए.पी., 30 से 40 किलोग्राम पोटाश व 10 किलो जिंक सल्फेट(21 प्रतिशत) खेत की तैयारी के समय अवश्य डालें। फसल बिजाई के बाद जहां खुला पानी मौजूद है वहां 45 से 50 दिन या इसके बाद ही पानी लगाएं और रेतीले इलाके में जहां फव्वारा विधि से पानी लगता है वहां भी कपास उगने के चार-पांच दिन बाद ही पानी लगा दें। कपास की शुरूआती अवस्था में ज्यादा जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए इससे मित्र कीटों की संख्या कम हो जाती है। इसके अलावा गत वर्ष जिन खेतों में या गांव में गुलाबी सुंडी की समस्या थी उन खेतों की लकडिय़ां, टिंडे व पत्तों को झाड़ कर नष्ट कर दें।

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