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Farmers Protest : किसान बोले, दूध के टैंकर ला सकते हैं, तो पानी की व्यवस्था भी कर लेंगे

आंदोलनकारी किसानों ने कहा कि वे अपने हक के लिए यहां दो महीने से अधिक समय से कड़कती ठंड में सड़कों पर बैठे हैं। सरकार सुनवाई नहीं कर रही। मांग पूरी करना तो दूर पानी जैसी मूलभूत सुविधा को भी बंद कर दिया गया है। पानी पिलाना तो धर्म होता है, लेकिन धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली है सरकार सारी हदें पार कर रही है।

Farmers Protest : किसान बोले, दूध के टैंकर ला सकते हैं, तो पानी की व्यवस्था भी कर लेंगे
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फाइल फोटो

हरिभूमि न्यूज. बहादुरगढ़

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों की जल व सफाई सेवा प्रशासन की तरफ से रोक दी गई है। बीते दो दिनों से आंदोलन में पेयजल व वह शौचालय के लिए पानी की व्यवस्था नहीं की जा रही। इस वजह से आंदोलनकारियों को थोड़ी परेशानी तो हो रही है, लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ है। आंदोलनकारियों का कहना है कि चाहे कोई लाख सितम करले, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। अगर हम यहां दूध के टैंकर ला सकते हैं तो पानी की व्यवस्था भी कर ही लेंगे। जरूरत पड़ी जमीन खोदकर पानी निकाल लेंगे।

दरअसल, दिल्ली कूच एलान के तहत गत 27 नवंबर की सुबह किसानों ने यहां टीकरी बॉर्डर पर पड़ाव डाला था। बार्डर से बाईपास पर कई किलोमीटर दूर तक डेरा डाले किसानों के लिए तब प्रशासन की ओर से पानी, सफाई आदि की व्यवस्था की गई। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा जहां पीने के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा था तो दमकल विभाग की गाडि़यां शौचालयों की टंकियों में पानी भर रही थीं। लेकिन गत 26 जनवरी को लाल किला प्रकरण के बाद से सेवा वाले हाथ पीछे खींचे जा रहे हैं। शुक्रवार को आंदोलन में पानी नहीं भेजा गया। यह सिलसिला शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। न तो पेयजल के टैंकर आए और ना ही शौचालय की टंकियों में पानी भरा गया। सफाई व्यवस्था का भी कुछ यही हाल है। पानी की सुविधा बंद होने पर आंदोलनकारियों ने प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई है।

आंदोलनकारी किसानों ने कहा कि वे अपने हक के लिए यहां दो महीने से अधिक समय से कड़कती ठंड में सड़कों पर बैठे हैं। सरकार सुनवाई नहीं कर रही। मांग पूरी करना तो दूर पानी जैसी मूलभूत सुविधा को भी बंद कर दिया गया है। पानी पिलाना तो धर्म होता है, लेकिन धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली है सरकार सारी हदें पार कर रही है। किसानों ने कहा कि जब हम दूध और लस्सी से भरे टैंकर ला सकते हैं तो पानी की भी व्यवस्था कर ही लेंगे। वहीं, किसानों और आंदोलन की सेवा में जुटे सामाजिक संगठनों ने अपने स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं। खालसा एड सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा बड़ी मात्रा में पानी की बोतल लाई गई हैं। आरओ सिस्टम की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा आसपास लगते गांव के लोग भी पानी पहुंचाने के लिए तैयार हैं। इस बारे में जब जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग व दमकल केंद्र के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश पर शुक्रवार ही पानी रोक दिया गया था। जहां फोर्स व पुलिस है, वहां पानी भेजा जा रहा है। बाकी जो भी अधिकारियों के आदेश होंगे, उनकी पालना की जाएगी।

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