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Farmers Protest : 5 अप्रैल को देशभर के एफसीआई दफ्तरों पर धरना, मई में संसद कूच करेंगे किसान

10 अप्रैल को केएमपी एक्सप्रैस-वे को 24 घंटे के लिए जाम किया जाएगा। इससे पहले पांच अप्रैल को एफसीआई के देशभर में 736 जिलों में कार्यालय के बाहर 11 बजे से शाम 6 बजे तक धरना प्रदर्शन होगा।

Farmers Protest : 5 अप्रैल को देशभर के एफसीआई दफ्तरों पर धरना, मई में संसद कूच करेंगे किसान
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कुंडली बार्डर पर पत्रकारों को बैठक में लिए फैसलों की जानकारी देते संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य।

हरिभूमि न्यूज. सोनीपत

बातचीत को लेकर केंद्र सरकार की बेरूखी से नाराज किसानों ने दिल्ली कूच का ऐलान कर दिया है। किसानों ने मई माह के पहले पखवाड़े में संसद भवन तक पैदल मार्च करने का फैसला लिया है। इसकी अगुवाई महिलाएं करेंगी और सभी बार्डर से एक साथ किसान पैदल दिल्ली के लिए निकलेंगे। पैदल जाने की वजह पिछली बार 26 जनवरी को बिगड़ी व्यवस्था है। किसान इस बार किसी तरह का जोखिम मोल नहीं लेना चाहते हैं।

10 अप्रैल को केएमपी रहेगा जाम

इसके अलावा 10 अप्रैल को केएमपी एक्सप्रैस-वे को 24 घंटे के लिए जाम किया जाएगा। इससे पहले पांच अप्रैल को एफसीआई के देशभर में 736 जिलों में कार्यालय के बाहर 11 बजे से शाम 6 बजे तक धरना प्रदर्शन होगा। किसानों ने बैसाखी पर्व व अंबेडकर जयंती धरनास्थल पर ही मनाने का निर्णय लिया है। अंबेडकर जयंती पर किसान संविधान बचाओ दिवस मनाएंगे, ताकि देश में लोकतंत्र को बचाया जा सके। इसी क्रम में एक मई को मजदूर दिवस मनाया जा रहा है। इसके बाद संसद कूच के लिए तारीख तय करके आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

संसद कूच के आंदोलन में महिलाएं, दलित, आदिवासी, बहुजन, बेरोजगार युवा और समाज का हर तबका शामिल होगा। इसमें भाग लेने के लिए बार्डर तक लोग अपने वाहनो से पहुंचेंगे और बार्डर से आगे नेताओं की अगुवाई में पैदल दिल्ली कूच होगा। यहां कुंडली में मंगलवार को हुई संयुक्त मोर्चा की बैठक में यह सारे निर्णय लिए गए हैं। इनके बारे में बुधवार को किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, एडवोकेट प्रेम सिहं भंगु, बूटा सिहं बुर्जगिल, सतनाम सिंह अजनाला रविंदर कौर, सरदार संतोख सिंह, जोगेंद्र नैन व प्रदीप धनखड़ ने जानकारी दी है।

सरकार की नीयत साफ नहीं : चढूनी

चढूनी ने कहा कि अगर सरकार की नीयत साफ है, तो प्रधानमंत्री संसद के पटल पर कह दें कि सभी 23 फसल एमएसपी पर खरीदी जाएंगी। अगर कोई प्राइवेट आदमी कम पर खरीदता है, तो बाकी के पैसे का भुगतान किसान को सरकार करेगी, किसान मान जाएंगे कि सरकार हितैषी है। उन्होंने दोहराया कि तीन कानूनों में किसी तरह की कमी-पेशी पर सहमति का सवाल ही नहीं है। सरकार बिना राज्यों की मंजूरी के यह कानून बना ही नहीं सकती है, तो कानून क्यों बनाए गए। यह राज्य सरकारों के भरोसे क्यों नहीं छोड़ा गया। इसलिए यह तीनों कानून पूरी तरह रद्द कराकर ही किसान घर के लिए लौटेंगे।


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