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आंदोलन मजबूत करने को बदली रणनीति : अब संगठनों के कर्मचारी संभालेंगे मोर्चा, किसान करेंगे फसल की कटाई

आंदोलन स्थल पर किसानों की संख्या पहले से काफी कम हो रही है। आंदोलन के कमजोर पड़ने की भी बात कही जा रही है। जिसे देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने निर्णय लिया है कि मोर्चे पर किसान की जगह अब कर्मचारी लेंगे।

आंदोलन मजबूत करने को बदली रणनीति : अब संगठनों के कर्मचारी संभालेंगे मोर्चा, किसान करेंगे फसल की कटाई
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मंच से किसानों को संबोधित करते किसान नेता।

हरिभूमि न्यूज. सोनीपत

केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत किसानों ने गेहूं कटाई सीजन को देखते हुए आंदोलन की रणनीति में बदलाव किया है। अब किसानों के मोर्चे पर कर्मचारी जिम्मेदारी संभालेंगे। इनके कंधों पर बॉर्डर पर मोर्चा संभाले रखने के साथ ही किलेबंदी मजबूत करने का दारोमदार रहेगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने बिजली संशोधन बिल- 2020 पर सरकार के फैंसले पर नाराजगी जताई है। किसानों ने चेताया कि केंद्र सरकार को फैसला महंगा पड़ेगा। इधर, गाजीपुर बार्डर पर बलिया से 1100 किलोमीटर साइकिल यात्रा करके पहुंचे किसान का स्वागत किया गया।

बता दें कि पंजाब समेत पूरे उत्तर भारत में गेंहू की कटाई का सीजन गति पकड़ चुका है। किसान नेताओं ने कहा कि बीती रात तेज तूफान और हल्की बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि अपने बच्चों की तरह पाली हुई गेहूं की फसल लगभग पक चुकी है और कटाई जारी है। ऐसे में आंदोलन स्थल पर किसानों की संख्या पहले से काफी कम हो रही है। ऐसे में किसान आंदोलन के कमजोर पड़ने की भी बात कही जा रही है। जिसे देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने निर्णय लिया है कि मोर्चे पर किसान की जगह अब कर्मचारी लेंगे। किसान संयुक्त मोर्चा ने कर्मचारियों के संगठनों से कहा है कि वह अपने सदस्यों की नियमित रूप से डयूटी तय करें। ताकि दिल्ली के चारों ओर लगे मोर्चे किसी सूरत में भी कमजोर ना पड़ें। इसके लिए अलग-अलग संगठन अलग-अलग दिन मोर्चे पर पहुंचेंगे और गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे।

पंजाब से हजारों किसानों ने शुरू की दिल्ली रवाना होने की तैयारी

डेमोक्रेटिक मुलाजम फेडरेशन व पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विस फेडरेशन के बैनर तले पंजाब के हजारों कर्मचारियों ने समर्थन देते हुए 11 अप्रैल को दिल्ली रवाना होने की तैयारी शुरू कर दी है। नेताओं ने कहा कि आंदोलन को किसी तरह कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि वह बिजली संशोधन विधेयक-2020 को कानून में बदलने का विचार न करे। यह किसानों से किए गए वायदे का उल्लंघन होगा। क्योंकि केंद्रीय मंत्रियों ने किसान नेताओं को आश्वासन दिया था कि इस बिल को रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसान आंदोलन के समर्थन में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की एक सदस्य ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। इसी तरह अन्य नेता भी संवदेनशीलता दिखाएं।



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