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Farmers Protest : पंजाब और हरियाणा के किसान नेताओं में हुआ विवाद, संसद मार्च किया रद्द

मोर्चा के नेताओं का कहना है संसद मार्च के लिए परिस्थिति को देखते हुए बाद में रणनीति बनाई जा सकती है।

Farmers Protest : पंजाब और हरियाणा के किसान नेताओं में हुआ विवाद, संसद मार्च किया रद्द
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 किसान नेताओं की बातें सुनते मंच के सामने बैठे किसान। फाइल फोटो

हरिभूमि न्यूज. सोनीपत

केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर दिल्ली की दहलीज पर साढ़े चार महीने से आंदोलनरत संयुक्त किसान मोर्चा में कलह हो गई है। संसद मार्च को लेकर शुरू हुई इस कलह में पंजाब व हरियाणा के नेता आमने-सामने हो गए हैं, जिस कारण संसद मार्च को रद्द कर दिया है। हालांकि दिल्ली की सीमा पर लगे मोर्चों को मजबूत करने पर किसान नेताओं का जोर है। मोर्चा के नेताओं का कहना है संसद मार्च के लिए परिस्थिति को देखते हुए बाद में रणनीति बनाई जा सकती है।

बता दें कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान साढ़े चार महीनों से घेरे बैठे हैं। 26-27 नवंबर से दिल्ली बॉर्डर पर डेरा जमाए बैठे किसानों और सरकार के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन सभी वार्ताएं विफल रही है। ऐसे में किसानों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन को तेज करने की रणनीति बनाई थी। इस कड़ी में किसान नेताओं ने संसद मार्च की रणनीति बनाई थी। संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल पंजाब के अधिकतर संगठनों के नेता परिस्थितियों को देखते हुए संसद मार्च के विरोध में खड़े हुए। वहीं हरियाणा व यूपी के किसान नेता संसद मार्च करने पर अड़े हुए थे। इसको लेकर ही संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में घंटों तक हंगामा भी चला और नेताओं के बीच आपस में खींचतान होने के बाद दिल्ली मार्च को फिलहाल रद्द कर दिया गया। फिलहाल दिल्ली की सीमा पर लगे मोर्चों को मजबूत करने पर जोर रहेगा और संसद मार्च के लिए परिस्थिति को देखते हुए बाद में रणनीति बनाई जा सकती है।

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