Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Farmers protest : उजाड़ पड़ी ग्रीन बेल्ट को हरा-भरा बना रहे किसान

पंजाब के किसान यहां के वातावरण के अनुकूल पौधों को रोपने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। फिरोजपुर जिले के आंदोलनकारी किसानों ने बताया कि उन्होंने यह जगह काफी पहले चिन्हित कर ली थी। इस ग्रीन बेल्ट की फैंसिंग के साथ पौधों को पानी देने की व्यवस्था की है

Farmers protest :  उजाड़ पड़ी ग्रीन बेल्ट को हरा-भरा बना रहे किसान
X

बहादुरगढ़ : आंदोलनकारी किसानों द्वारा संवारी गई ग्रीन बेल्ट।

रवींद्र राठी. बहादुरगढ़

किसानों ने आंदोलन के दौरान आगामी गर्मी के सीजन को देखते हुए तैयारी तेज कर दी हैं। 'धरती पुत्र' ने गर्मी से बचने के लिए प्रकृति की शरण में जाने की कवायद शुरू कर दी है। शहर के हाईवे पर कई साल से उजाड़ पड़ी ग्रीन बेल्ट की जमीन को अब आंदोलनकारी किसान हरा-भरा बनाने में जुटे हैं। अनेक हिस्सों में किसानों द्वारा की गई मेहनत को देखने के बाद लगने लगा है कि यह ग्रीन बेल्ट है। सफाई, कटाई-छंटाई के बाद यहां छायादार पेड़ों के साथ गमलों में आकर्षक पौधे लहलहा रहे हैं। पंजाब के फिरोजपुर जिले के किसानों ने इसे 'किसान वेड़ा' नाम दिया है।

शहर में ग्रीन बेल्ट की हालत किसी से छिपी नहीं है। जिस ग्रीन बेल्ट को स्थानीय लोगों ने कूड़ा घर बना दिया था। यहां बाईपास पर करीब 3 महीने से जमे आंदोलनकारी किसानों ने अब इस उजड़ी ग्रीन बेल्ट को संवारने का जिम्मा उठाया है। अब उन्होंने यहां सफाई करने के साथ ही अधिक पौधे रोपकर हरियाली को विकसित कर दिया है। पंजाब के किसान यहां के वातावरण के अनुकूल पौधों को रोपने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। फिरोजपुर जिले के आंदोलनकारी किसानों ने बताया कि उन्होंने यह जगह काफी पहले चिन्हित कर ली थी। इस ग्रीन बेल्ट की फैंसिंग के साथ पौधों को पानी देने की व्यवस्था की है। जब प्रयास रंग लाए तो यहां गमले व झूले भी लगाए जा रहे हैं। आंदोलनकारियों द्वारा विकसित किए जा रहे 'किसान वेड़े' में छायादार, फलदार, फूलदार सहित अन्य पेड़-पौधे लहलहा रहे हैं।

अपने घरों में सफाई और खेत-खलिहान हरे-भरे रखने के लिए विख्यात 'अन्नदाता' गत तीन महीनों से दिल्ली के टीकरी बॉर्डर पर भी डेरा डाले हैं। आंदोलनकारी किसानों के अलग-अलग गुट एक-दूसरे से प्रेरणा लेकर यहां गर्मी बढ़ने से पहले हरियाली में राहत पाने का इंतजाम कर रहे हैं। पंजाब के फिरोजपुर जिला निवासी किसान जोगेंद्र सिंह ने कहा कि ठंड तो उन्होंने तंबू में रजाई लेकर काट ली। ज्येष्ठ की गर्मी में सड़क पर तपिश बहुत होगी। जबकि ग्रीन बेल्ट में हरे भरे दरख्तों के नीचे गंदगी और झाडि़यों की भरमार थी। प्रीत सिंह और सिमरनजीत सिंह ने कहा कि वे किसान पुत्र हैं, सभी ने खूब मेहनत की। जिसके दम पर सफाई के बाद अब इसे हरा-भरा बनाया जा रहा है। यहां चारपाई बिछाने के साथ ही झूले भी लगाएंगे।

किसान जसविंद्र सिंह का कहना है कि उनके साथ वृद्ध, बच्चे व महिला भी हैं। तापमान बढ़ने के साथ ही सड़क पर गर्मी बढ़ने लगी है। इसीलिए यहां ग्रीन बेल्ट में बसेरा बना रहे हैं। उनके अनुसार गांव में 5 हजार लोग हैं, यहां हर समय 50 लोग बारी-बारी से रहते हैं। हम यहां रहते हैं, यह हमारा आशियाना है। किसानों को सरकार से लंबी लड़ाई लड़नी है। अपने स्वभाव के अनुसार वे हर जगह अच्छा काम करते हैं।

Next Story