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Farmers Protest : कृषि कानूनों के विरोध में किसान ने खड़ी फसल पर चला दिया ट्रैक्टर

राममेहर ने बताया कि अगर फसल को पकाव की तरफ ले जाता हूं तो खर्च ज्यादा बढ़ेगा। आगे भाव भी सही मिलने की कोई गारंटी नहीं है। फसल को भंडारण करने का उसके पास कोई संसाधन नहीं है। इससे अच्छा है कि फसल को पकने से पहले ही नष्ट कर दिया जाए।

Farmers Protest : कृषि कानूनों के विरोध में किसान ने खड़ी फसल पर चला दिया ट्रैक्टर
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गुलकनी गांव में अपनी फसल को नष्ट करते किसान राममेहर।

हरिभूमि न्यूज. जींद

तीन कृषि कानून को रद्द न करने से खफा गांव गुलकनी के किसान ने अपनी दो एकड़ खड़ी गेहूं फसल की ट्रैक्टर हैरो के साथ जुताई कर दी। पूर्व में उत्तर प्रदेश में भी खफा किसान ने खड़ी फसल को जोत दिया था। खड़ी फसल की जुताई करने वाले किसान का कहना है कि भंडारण करने की उनकी क्षमता नहीं है। अगर फसल का उचित मूल्य नहीं मिलेगा तो नष्ट करने के सिवाए कोई और चारा नहीं है। जो बिजाई से अब तक उसे नुकसान हुआ उसे सहन कर लेंगे लेकिन पकने तक और खर्च बढ़ेगा।

अगर पकने के बाद फसल का मूल्य सही नहीं मिला तो उसे और जयादा नुकसान उठाना पड़ेगा। काबिलेगौर है कि भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ब्यान दिया था कि अगर किसानों की मांगे पूरी नहीं हुई तो किसान अपनी खड़ी फसलों को जला देंगे। गांव गुलकनी निवासी राममेहर रविवार को ट्रैक्टर हैरो लेकर अपने खेत में पहुंचा और दो एकड़ फसल की जुताई कर दी। इस दौरान राममेहर परिवार की महिलाओं के अलावा काफी संख्या में किसान भी खेत में पहुंचे। जब खेत में खड़ी फसल को नष्ट किया जा रहा था उस दौरान किसान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे। किसान राममेहर ने कहा कि पिछले तीन माह से किसान तीन कृषि कानून को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार किसानों की बातें नहीं सुन रही है।

फसल को पकाता तो और खर्च बढ़ता

200 से जयादा किसानों की जाने जा चुकी हैं। सरकार के इस रवैये से वे खफा है, जिसके चलते उन्होंने अपनी दो एकड़ फसल को नष्ट करना पड़ा। दस एकड़ की खेतीबाड़ी करने वाले राममेहर ने बताया कि अगर फसल को पकाव की तरफ ले जाता हूं तो खर्च ज्यादा बढ़ेगा। आगे भाव भी सही मिलने की कोई गारंटी नहीं है। फसल को भंडारण करने का उसके पास कोई संसाधन नहीं है। इससे अच्छा है कि फसल को पकने से पहले ही नष्ट कर दिया जाए, ताकि नुकसान से बचा जा सके। अगर फसल पकने पर उसे जलाते है तो वायु प्रदूषण होगा और जमीन की उर्वरता भी समाप्त हो जाएगी। साथ ही अवशेष फूंकने पर सरकार के कानूनी दायरे में आएंगे। हरी भरी फसल नष्ट करने से खेत की उर्वरता बढ़ेगी और पकने तक आने वाले खर्च से भी बचा जा सकेगा। राममेहर ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा जो भी आंदोलन को लेकर आह्वान करेगा वे उसकी पालना करेंगे। इसी प्रकार गांव के अन्य खेत में मौजूद किसानों ने भी तीन कृषि कानून को रद्द करने की मांग की और मांगे न माने जाने पर फसलों को नष्ट करने की चेतावनी दी।

अब शिफ्टों में दिल्ली की तरफ कूच कर रहे किसान

गेहूं कटाई का सीजन होने के चलते किसानों ने भी दिल्ली कूच के मामले में अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए शिफ्टों में जाने का निर्णय लिया है। किसान ट्रैक्टर ट्रालियों की बजाए अब निजी वाहनों से दिल्ली की तरफ संसाधनों के साथ कूच कर रहे है। ताकि आगामी भीष्ण गर्मी से बचा जा सके। किसानों का कहना है कि गेहूं कटाई का सीजन होने के चलते ट्रैक्टरों की खेतों में जरूरत है। आंदोलन प्रभावित न हो इसको लेकर एक-एक सप्ताह की शिफ्ट में किसान दिल्ली भेजे जा रहे हैं। निजी वाहनों में वेल्डिंग मशीन, तिरपाल व अन्य खादय जरूरतों का सामान भेजा जा रहा है। किसानों ने साफ कहा कि जब तक तीन कृषि कानून रद्द नहीं होते तब तक वे घर वापस नहीं लौटेंगे।


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