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नगर निगम घोटाला : तीन अधिकारियों को जेल, एक अधिकारी रिमांड पर, हुए बड़े खुलासे

वरिष्ठ लेखा अधिकारी हरगुलाल फागना के खाते में नगर निगम के ठेकेदार ओमबीर द्वारा एक करोड़ रुपये भेजे जाने की जानकारी मिली है। यह रुपये साल 2017 से 2020 के बीच भेजे गए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

फरीदाबाद। बिना काम ठेकेदार को 200 करोड़ रुपये का भुगतान करने के घोटाले मामले में गिरफ्तार किए गए आडिट व अकाउंट शाखा के चारों अधिकारियों को एक दिन का रिमांड पूरा होने पर विजिलेंस ने शुक्रवार को अदालत में पेश किया। अदालत ने आडिट शाखा के संयुक्त निदेशक दीपक थापर, वरिष्ठ लेखा अधिकारी विशाल कौशिक, वत्ति नियंत्रक सतीश कुमार को जेल भेज दिया है। विजिलेंस ने अदालत से वरिष्ठ लेखा अधिकारी हरगुलाल फागना का एक दिन का रिमांड बढ़वाया है।

आरोपियों से पूछताछ में विजिलेंस को पता चला है कि ठेकेदार को बिलों का भुगतान करने के लिए आडिट व अकाउंट शाखा के अधिकारियों का एक से डेढ़ प्रतिशत कमीशन तय था। जब विजिलेंस ने आरोपियों से सवाल किया कि उन्होंने काम का आडिट किए बिना बिलों का भुगतान क्यों किया। आरोपियों ने जवाब दिया कि सभी बिलों व आडिट रिपोर्ट पर पहले ही कार्यकारी अभियंता के हस्ताक्षर होते थे, इसलिए वे आडिट नहीं करते थे। विजिलेंस ने सभी आरोपियों के बैंक खातों की भी जांच की है।

हरगुलाल फागना के खाते में आए एक करोड़ रुपये

विजिलेंस सूत्रों ने बताया कि वरिष्ठ लेखा अधिकारी हरगुलाल फागना के खाते में नगर निगम के ठेकेदार ओमबीर द्वारा एक करोड़ रुपये भेजे जाने की जानकारी मिली है। यह रुपये साल 2017 से 2020 के बीच भेजे गए। इसी समयावधि में नगर निगम में घोटाला हुआ था। हरगुलाल इन रुपयों के बारे में कोई उचित जवाब नहीं दे पाए हैं। इसलिए विजिलेंस ने उनका रिमांड बढ़वाया। विजिलेंस अब ठेकेदार ओमबीर से भी पूछताछ करेगी।

इन मुकदमों में नामजद हैं आरोपी

चारों आरोपी विजिलेंस के मुकदमा नंबर 11 और 13 में नामजद हैं। मुकदमा नंबर 11 में 1.90 करोड़ का हेरफेर है। वहीं मुकदमा नंबर 13 में करीब पांच करोड़ रुपये का हेरफेर की बात सामने आई है। विजिलेंस का कहना है कि बिना आडिट और मौका मुआयना किए आरोपियों ने बिल पास कर दिए। इस तरह बिना काम किए ठेकेदार के खाते में रुपये पहुंच गए। इस मामले में विजिलेंस ठेकेदार सतबीर, निलंबित मुख्य अभियंता दौलतराम भास्कर और रमन शर्मा व जेई दीपक को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। सभी आरोपियों को अदालत से जमानत मिल चुकी है।

यह है मामला

यह घोटाला मई 2020 में उजागर हुआ था। फरीदाबाद नगर निगम के चार पार्षदों दीपक चौधरी, दीपक यादव, सुरेंद्र अग्रवाल, महेंद्र सरपंच ने तत्कालीन निगम आयुक्त को शिकायत दी थी कि निगम के लेखा विभाग ने ठेकेदार सतबीर की विभन्नि फर्मों को बिना काम किए भुगतान कर दिया है। निगम आयुक्त ने अपने स्तर पर मामले की जांच कराई। ठेकेदार को भुगतान में अनियमितताएं पाए जाने पर उन्होंने विजिलेंस से जांच की सिफारिश की। साल 2020 से विजिलेंस इस मामले की जांच कर रही थी। विधानसभा में विधायक नीरज शर्मा द्वारा मामला उठाने के बाद जांच में तेजी आई और आरोपियों की गिरफ्तारी होनी शुरू हुई।

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