Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Family Planning : परिवार नियोजन में पुरुषों से आगे हैं महिलाएं, जानिए नसबंदी और नलबंदी में अंतर

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर पुरूषों की बजाए महिलाएं अपनी जिम्मेवारी अधिक निभा रही हैं। परिवार नियोजन के लिए पुरुषों को कोई चीरा नहीं लगाया जाता जबकि महिलाओं को चीरा लगाना पड़ता है।

जानें क्या है महिला नसबंदी और इसके फायदे- नुकसान, नहीं पड़ेगी  गर्भनिरोधक गोलियों की जरूरत
X

Family Planning 

हरिभूमि न्यूज : जींद

परिवार नियोजन या जनसंख्या नियंत्रण को लेकर पुरूषों की बजाए महिलाएं अपनी जिम्मेवारी अधिक निभा रही हैं। परिवार नियोजन के लिए पुरुषों को कोई चीरा नहीं लगाया जाता जबकि महिलाओं को चीरा लगाना पड़ता है। इसके बावजूद महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा इस मामले में कहीं अधिक आगे निकल रही हैं। एक वर्ष में जींद जिले में 28 पुरुषों ने परिवार नियोजन को अपनाया है जबकि 1216 महिलाओं ने पुरुषों से अधिक परिवार नियोजन को बढ़ावा दिया है। जिससे साफ जाहिर होता है कि जनसंख्या नियंत्रण की जिम्मेदारी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं पर अधिक है।

कैसे होती है पुरुषों की नसबंदी

परिवार नियोजन अपनाने पर महिलाओं से अधिक पुरुषों को सरकार द्वारा सहायता राशि अधिक दी जाती है। यदि कोई पुरुष परिवार नियोजन के तहत नसबंदी ( एनएसवी ) करवाता है तो सरकार की तरफ से उसे दो हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा उसको प्रेरित करने वाले व्यक्ति को भी 300 रुपये दिए जाते हैं। इसमें नसबंदी के दौरान कोई चीरा नहीं लगाया जाता बल्कि दूरबीन द्वारा एक छोटा सा टांका लगाया जाता है। इससे पुरुषों को किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं होती। वह उसी दिन से आराम से चल-फिर सकता है और उसके स्वास्थ्य पर भी कोई असर नहीं होता।

महिलाओं की नलबंदी

वहीं यदि महिला नलबंदी का ऑपरेशन करवाती है तो उसे स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 1400 रुपये मिलते हैं जबकि उसको प्रेरित करने वाले को 200 रुपये मिलते हैं। यदि महिला प्रसव के साथ ही नलबंदी ऑपरेशन करवाती है तो उसे 2200 रुपये तथा प्रेरित करने वाले को 300 रुपये दिए जाते हैं। महिलाओं की नलबंदी के दौरान एक प्रकार का ऑपरेशन होता है, जिसमें चीरा भी लगता है। जिसके बाद महिलाओं को एक से डेढ़ महीना आराम करना पड़ता है। इसमें पुरुषों और महिलाओं की तुलना महिलाओं को ज्यादा तकलीफ उठानी पड़ती है। इसके बावजूद परिवार नियोजन का भार महिलाएं अधिक उठा रही हैं जबकि पुरुष इसमें काफी पीछे हैं।

परिवार नियोजन में पुरूषों की संख्या कम : सीएमओ

सीएमओ डा. मंजू कादियान ने कहा कि एनएसवी के लिए समय-समय पर जागरूकता शिविर लगाए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग एनएसवी के पुरुषों को फायदे भी बताता है तथा इससे मिलने वाली सहायता राशि भी दी जाती है। इसके बावजूद पुरुष काफी कम संख्या में परिवार नियोजन के लिए आगे आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार पुरुषों को परिवार नियोजन में आगे लाने का प्रयास करता है।

और पढ़ें
Next Story