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भिवानी : कांग्रेेस में गुटबाजी फिर सतह पर, धड़ेबंदी की भेंट चढ़ गया प्रदर्शन

कांग्रेस आला कमान के आदेशों के बाद कांग्रेस (Congress) की जिला इकाई ने शहर में प्रदर्शन किया,लेकिन अपने-अपने नेताओं के नामों के नारे लगाने को लेकर गुटों में कांग्रेसी बट गए। हालांकि विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे पूर्व विधायक के समझाने के बाद दोनों गुट शांत हुए,लेकिन एक बार तो सचिवालय पहुंचने से पहले अलग-अलग धड़ों में बिखर गए थे।

भिवानी : कांग्रेेस में गुटबाजी फिर सतह पर, धड़ेबंदी की भेंट चढ़ गया प्रदर्शन
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हरिभूमि न्यूज : भिवानी

प्रदेश की सतारूढ सरकार में हो रहे कथित रूप से घोटालों को लेकर कांग्रेस के गुरुवार को विरोध प्रदर्शन (Protest) का ऐलान खुद के नेताओं के विरोध की भेंट चढ़ गया। हालांकि कांग्रेस आला कमान के आदेशों के बाद कांग्रेस (Congress) की जिला इकाई ने शहर में प्रदर्शन किया,लेकिन अपने-अपने नेताओं के नामों के नारे लगाने को लेकर गुटों में कांग्रेसी बंट गए। हालांकि विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे पूर्व विधायक के समझाने के बाद दोनों गुट शांत हुए,लेकिन एक बार तो सचिवालय पहुंचने से पहले अलग-अलग धड़ों में बिखर गए थे। हालात ये बने थे कि एक गुट के दो स्थानीय नेता दूसरे खेमें में खड़े थे। पहले गुट वाले ने दोनों स्थानीय नेताओं ने अपने गुट में बुला लिया।

हुआ यूं कि प्रदेश में बढते भ्रष्टाचार व बढ़ती महंगाई के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने पूरे प्रदेश में आंदोलन चलाने का ऐलान किया था। सभी जिलों में मैसेज भेजकर कांग्रेस की जिला इकाई को विरोध स्वरूप उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजे का फैसला लिया गया था। फैसले के मुताबिक कांग्रेसी नेताओं ने पुराना बस स्टैंड से सत्तासीन सरकार के खिलाफ जुलूस शुरू किया। जुलूस शुरू होते ही कुछ नेताओं ने कांग्रेस के बड़े नेताओं के नाम पर नारे लगाने शुरू कर दिए। इसी दौरान एक पक्ष ने स्व. बंसीलाल व सुरेंद्र के नाम लेकर भी लगाने शुरू कर दिए। कुछ देर तक दूसरे गुट के नेताओं ने नारे सुने और उसके बाद उन्होंने अपने नेता के नाम के नारे न लगाने को लेकर ऐतराज कर दिया। ऐतराज होते ही जुलूस में नारेबाजी बंद हो गई। नेता कांग्रेसी नेताओं के नारे लगाने की बजाए आपस में उलझने लगे। सचिवालय के उपायुक्त को ज्ञापन देने से पहले करीब दो से तीन मिनट तक दोनों पक्षों में नारे को लेकर तू-तड़ाक होती रही। मामला बढ़ता देखकर धरने की अगुवाई कर रहे पूर्व विधायक ने हस्तक्षेप करते हुए मामला शांत करवाया। उनका तर्क था कि जिसके भी लगाए जा रहे है आखिर में कांग्रेसी तो है। उसके बाद ही प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा।

दूसरे खेमे में खड़े अपने नेताओं को बुलाया

अपने-अपने नेताओं को लेकर की जा रही नारेबाजी को लेकर जबरदस्त तू-तड़ाक होने लगी। हालात ये बने कि नेताओं ने अपने-अपने गुट के स्थानीय नेताओं को अपने पास बुला लिया। सचिवालय के पास हुड्डा व किरण खेमे के नेता नारेबाजी को लेकर उलझ रहे थे। हुडडा खेमे के दो स्थानीय नेता अनजाने में किरण गुट के खेमे में खड़े हो गए। हुड्डा खेमे के नेताओं की नजर उन पर पड़ी तो उनको तत्काल अपनी खेमे में लौट आने की कही। वे दोनों नेता हुड्डा खेमे में लोट भी आए। पूरे दिन शहर में कांग्रेसियों की अपने-अपने नेताओं के पक्ष में नारे लगाने की चर्चा आमजन में रही।

कथित घोटालों को लेकर आंदोलन

कांग्रेस ने प्रदेश में शराब घोटाला,भूमि की रजिस्ट्रियों में हुई गड़बड़ियों तथा धान घोटाले को लेकर आज प्रदर्शन हुआ है। जिसमें कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने उक्त घोटालों की बेहतरीन ढंग से जांच करवाए जाने तथा जो इस मामले के दोषी है। उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है। राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में इन मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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