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नौ माह बाद भी नहीं मिली दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा घोषित की गई सहायता राशि

जनता की सेवा करते-करते कोविड-19 संक्रमित हुए दिल्ली पुलिस के जवान गांव हुल्लेड़ी निवासी अमित राणा की मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद दिल्ली सरकार ने परिवार को सहायत राशि देने के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी।

नौ माह बाद भी नहीं मिली दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा घोषित की गई सहायता राशि
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 मृतक पुलिस कर्मी की पत्नी व उसके बच्चे।

हरिभूमि न्यूज : सोनीपत

दुनिया में कोविड-19 संक्रमण ने जमकर कहर बरपाया। देश में कोविड-19 से हुई मौत का आकड़ा बहुत बड़ा हैं। ऐसी महामारी के दौरान अपनी जान की प्रवाह किए बिना अपनी डयूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों व खाकी के जवानों ने अपनी अहम भूमिका निभाई। जनता की सेवा करते-करते कोविड-19 संक्रमित हुए दिल्ली पुलिस के जवान गांव हुल्लेड़ी निवासी अमित राणा की मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद दिल्ली सरकार ने परिवार को सहायत राशि देने के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी। लेकिन नौ माह बाद भी उक्त घोषणा राशि मृतक के परिजनों को नहीं मिली हैं। जिसको लेकर मृतक की पत्नी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पर जल्द सहायता राशि देने की अपील की हैं। वहीं मृतक के बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा करने वाले क्रिकेटर से नेता बने गौतम गंभीर भी नौ माह से कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। उनकी घोषणा भी अभी तक अधर में लटकी हुई हैं।

बता दें के गांव हुल्लेड़ी हाल में टीकाराम कॉलेज के पास रहने वाला अमित (32) दिल्ली पुलिस में तैनात था। वह अपनी पत्नी व बेटे के साथ शहर में रहता था। लॉकडाउन व दिल्ली में तैनात कर्मचारियों की वजह से शहर में फैल रहे वायरस की चैन को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने राजधानी से लगने वाली सभी सीमाओं को सील कर दिया था। जिसके बाद दिल्ली में कार्यरत कर्मचारी वहीं रहकर डयूटी दे रहे थे। जिसके चलते अमित भी लगातार डयूटी दे रहा था। जानकारी मिली हैं कि उसे बचाने की कोशिश करने वाले उसके एक साथी की ऑडियो वायरल हुई थी, जिसमें उसने बताया है कि 16 घंटे पहले उसके साथी की तबीयत बिगड़ने लगी थी। ऑडियो में वह बता रहा है कि कैसे हल्का बुखार होने पर उसे दवाई दी और फिर बुखार ठीक हो गया लेकिन कुछ देर बाद फिर से उसकी तबीयत बिगड़ गई। ऐसे में उसने सबसे पहले दिल्ली की कोराना हेल्पलाइन नंबर पर कॉल की लेकिन वहां से जवाब मिला कि वे केवल टेस्ट कर सकते हैं। इसके बाद उसने करीब आधा दर्जन अस्पतालों में उसके साथी को दाखिल कर लेने की गुहार लगाई लेकिन सभी ने साफ इंकार कर दिया। कुछ ने जगह न होने की बात कही तो कुछ ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद ही दाखिल किया जाएगा। वहीं, पुलिस जवान की लगातार बिगड़ती तबीयत से उसकी हालत खराब हो गई और पांच मई को पुलिस कर्मी की मौत हो गई थी।

कोरोना वॉरियर्स के लिए एक करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की थी

कोरोना वॉरियर्स की मदद के बड़े-बड़े दावे कोरोना संकट के दौरान सरकारें कर रही थी। उस दौरान सरकारों ने जो घोषणा की थी उस पर कितना अमल नौ माह बाद तक नहीं किया गया। उत्तरी पश्चिमी जिले के भारत नगर थाने में तैनात कॉन्स्टेबल अमित राणा की कोरोना के कारण मौत हो गई थी। अमित राणा की कोरोना के कारण मौत के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस कोरोना वॉरियर्स के लिए एक करोड़ रुपए की सहायता की घोषणा की थी। अकेले अमित राणा के लिए नहीं किसी भी कोरोना वोरियर्स की मौत पर एक करोड रुपए की सहायता राशि के दावे दिल्ली सरकार ने किए थे। साथ ही इस कॉन्स्टेबल के बच्चों के परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी बीजेपी के सांसद गौतम गंभीर ने उठाने की बात कही थी, नौ माह बीत जाने के बाद दिल्ली सरकार की ओर से कोई सहायता मिली न ही गौतम गंभीर ने जो घोषणा की थी वह सहायता मिली।

15 दिन पहले बेटी को दिया जन्म, मायके में रहकर गुजारा-बसर करने को मजबूर मृतक की पत्नी

हरियाणा के सोनीपत निवासी कॉन्स्टेबल का काफी गरीब परिवार है और अब इस परिवार के मुखिया के इस दुनिया से चले जाने के बाद उसके पालन में भी दिक्कत हो रही हैं। मृतक अमित राणा का पिता बुढ़ापे के आगे बेबस हैं। वहीं अमित राणा की पत्नी ने बताया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने जो एक करोड़ रुपए की सहायता राशि की घोषणा की थी वह उनके परिवार को अभी तक नहीं मिली है, और ना ही गौतम गंभीर ने जो वायदा किया था वह पूरा हुआ हैं। गत 15 दिनों पहले उसने बेटी को जन्म दिया हैं। वह खुद मायके में रहकर बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं।

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