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ऐलनाबाद उपचुनाव : ऐलनाबाद की पूरी रामकहानी देवीलाल परिवार पर रची बुनी है

आइए आज ऐलनाबाद विधानसभा सीट के इतिहास पर नजर डालते हैं। अगर आप इस सीट के चुनाव परिणामों पर नजर डालेंगे तो पाएंगे ये चौधरी देवीलाल के दो बेटों ने इसी सीट से चुनाव लडकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। चौधरी प्रताप सिंह चौटाला और चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने ऐलनाबाद सीट से ही अपने जीवन के पहले चुनाव लडे।

ऐलनाबाद उपचुनाव : ऐलनाबाद की पूरी रामकहानी देवीलाल परिवार पर रची बुनी है
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धर्मेंद्र कंवारी : रोहतक

निवार्चन आयोग ने ऐलनाबाद उपचुनाव की तिथि की घोषणा कर दी है। 30 अक्टूबर 2021 को अभय सिंह चौटाला के इस्तीफे से खाली हुई ऐलनाबाद सीट पर उपचुनाव होंगे और 2 नवंबर को नतीजों की घोषणा कर दी जाएगी। इनेलो की तरफ से अभय सिंह चौटाला का नाम करीबन तय है लेकिन भाजपा-जजपा और कांग्रेस को अपना उम्मीद्वार फाइनल करना है। आइए आज ऐलनाबाद विधानसभा सीट के इतिहास पर नजर डालते हैं। अगर आप इस सीट के चुनाव परिणामों पर नजर डालेंगे तो पाएंगे ये चौधरी देवीलाल के दो बेटों ने इसी सीट से चुनाव लडकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। चौधरी प्रताप सिंह चौटाला और चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने ऐलनाबाद सीट से ही अपने जीवन के पहले चुनाव लडे।

हरियाणा गठन के बाद हुए पहले चुनाव 1967 में चौधरी देवीलाल के बडे बेटे प्रताप सिंह चौटाला यहां से कांग्रेस के उम्मीद्वार थे। उनके सामने थे निर्दलीय प्रत्याशी लालचंद खोड। प्रताप सिंह चौटाला ने लालचंद खोड को पटखनी देखकर विधानसभा का मुंह देखा।

इसके बाद आयाराम गयाराम का दौर चला और एक साल बाद ही मध्याविधि चुनाव की नौबत आन खडी हुई। इस चुनाव में चौधरी देवीलाल ने अपने बेटे ओमप्रकाश चौटाला को कांग्रेस की टिकट दिलवा दी वहीं उनके सामने आ डटे विशाल हरियाणा पार्टी टिकट पर लालचंद खोड। लालचंद खोड ने चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला को हरा दिया। जीवन का पहला चुनाव हारने के बाद ओमप्रकाश चौटाला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारीज कर दिया। चौटाला ने इससे हार नहीं मानी वो सुप्रीम कोर्ट चले गए और वहां से मई 1970 में फैसला आ गया कि लालचंद खोड के चुनाव और जीत को अवैध घोषित किया जाता है।

जीते जिताए लालचंद खोड घर बैठ गए और ओमप्रकाश चौटाला ने चुनावी ताल उपचुनाव में ठोक दी। 10 मई 1970 को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ। इस बार ओमप्रकाश चौटाला की नैया पार लग गई और उन्होंने जनसंघ के प्रत्याशी पृथ्वीराज को चुनावी मैदान में शिकस्त दी।

इसके बाद आए 1972 के आम चुनाव। इस बार देवीलाल परिवार से किसी ने चुनाव नहीं लडा लेकिन चौटाला ही गांव के चौधरी बृजलाल कांग्रेस की टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे और निर्दलीय बीरबल को हरा दिया।

1977 में ये सीट आरक्षित हो गई और एक तरीके से ऐलनाबाद में राजनीतिक रामराज का समय आ गया। साल 2005 तक के 28 साल में कुल छह चुनाव हुए जिनमें पांच अकेले लोकदल के भागीराम ने जीते। 1977, 1982 और 1987 में भागीराम ने जीत की हेट्रिक और मनीराम ने हार की हैट्रिक अपने खाते में दर्ज करवा ली। 1991 में मनीराम का सिक्का चल निकला और भागीराम के भाग में हार लिखी गई।

1996 में फिर से भागीराम मैदान में डटे थे और उन्होंने हविपा भाजपा के प्रत्याशी करनैल सिंह को हराया। 2000 के चुनाव में फिर से भागीराम ने कांग्रेसी ओमप्रकाश को हरा अपने खाते में पांचवीं जीत दर्ज कर ली। भागीराम आज भी स्वस्थ हैं और अपने गांव में रहते हैं।

2005 में इनेलो के डॉ सुशील इंदौरा ने मनीराम को ही हराया लेकिन 2008 में सामान्य हलका होते ही ऐलनाबाद फिर से लाइमलाइट में आ गया। 2009 में ओमप्रकाश चौटाला यहां से उम्मीद्वार थे और उन्होंने भरतसिंह बैनिवाल को पटखनी दी। 2010 में यहां फिर से उपचुनाव हुआ क्योंकि ओमप्रकाश चौटाला ने दो सीट से जीते थे एक तो उचाना और दूसरी ऐलनाबाद। उन्होंने उचाना सीट रख ली और यहां से इस्तीफा दे दिया। इस उपचुनाव में अभय सिंह चौटाला ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेसी भरत सिंह बैनिवाल को हराया था। इसे पहले अभय साल 2000 में रोडी से विधायक बने थे लेकिन 2005 और 2009 के विधानसभा चुनाव नहीं लडे। तब भी ओमप्रकाश चौटाला नरवाना और रोडी दो जगह से चुनाव जीते थे। नरवाना अपने पास रखकर रोडी हलके से इस्तीफा दे दिया था, इसके बाद उपचुनाव में अभय यहां से जीते थे।

2014 में अभय सिंह यहां से चुनावी मैदान में उतरे और अपने पुरानी साथी भाजपा के पवन बैनिवाल को हराया। 2019 के चुनाव में भी अभय ने अपने खाते में दूसरी जीत और पवन के खाते में दूसरी हार दर्ज हुई। अब अभय चौटाला के इस्तीफे के बाद फिर से यहां उपचुनाव होने हैँ।

अंत में एक नजर अभय सिंह चौटाला पर डाल लेते हैं जिनके इस्तीफे से ये सीट खाली हुई। अभय ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत चौटाला गांव का पंच बनकर की थी। इसके बाद वे उपसरपंच भी रहे। ब्लॉक समिति चुनाव भी जीता। दो बार जिला परिषद के लिए चुने गए और दोनों ही बार जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे। विधानसभा चुनावों मे अलावा अभय चौटाला ने 2004 में कुरुक्षेत्र से नवीन जिंदल के सामने चुनाव लडा था लेकिन हार गए थे। भारतीय ओलंपिक संघ के भी वे अध्यक्ष रहे हैं।

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