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यहां पराली से बनेगी बिजली, हर घंटे होगा 15 मेगावाट का उत्पादन

प्रोजेक्ट के महा प्रबंधक आर.पी. सिन्हा ने बताया कि कैथल जिला के इस धान बाहुल्य क्षेत्र में ये संयंत्र स्थापित किया गया है। इस प्रोजैक्ट के साथ सैंकड़ों लोगों को रोजगार से जोड़ा है, दो हजार टैक्ट्रर-ट्राली इस प्रोजैक्ट क्षेत्र के 50 किलो मीटर के दायरे से खेतों से धान की पराली की गांठे इस संयंत्र तक पहुंचाने का काम करती हैं।

यहां पराली से बनेगी बिजली, हर घंटे होगा 15 मेगावाट का उत्पादन
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एकत्रित की गई पराली की गांठ, कांगथली गांव में तैयार किया गया संयंत्र

हरिभूमि न्यूज. कैथल

हरियाणा सरकार की पराली प्रबंधन को लेकर की जा रही कोशिशें अब रंग लाने लगी है। अब किसान पराली जलाने की बजाए उसे बेचकर सरकार की योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। अब तो आमजन भी पराली के इस प्रबंधन में अपना योगदान देने के लिए आगे आ रहे हैं और पराली से बिजली का उत्पादन करने के लिए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। ऐसा ही एक पावर जनरेशन संयंत्र सैल लिमिटिडी कंपनी के रूप में कांगथली में स्थित है, जहां पराली से हर घंटे 15 मेगावाट बिजली उत्पादन करने की तैयारी लगभग मुकम्मल है और जल्द ही ये संयंत्र अपना काम करना शुरू कर देगा।

प्रोजेक्ट के महा प्रबंधक आर.पी. सिन्हा ने बताया कि कैथल जिला के इस धान बाहुल्य क्षेत्र में ये संयंत्र स्थापित किया गया है। इस प्रोजैक्ट के साथ सैंकड़ों लोगों को रोजगार से जोड़ा है, दो हजार टैक्ट्रर-ट्राली इस प्रोजैक्ट क्षेत्र के 50 किलो मीटर के दायरे से खेतों से धान की पराली की गांठे इस संयंत्र तक पहुंचाने का काम करती हैं। ये ट्रेक्टर-ट्रालियां खेतों में सीधे पहुंचकर वहां कृषि विभाग के माध्यम से पराली को काटकर उनकी गांठे बनाने वाले बेलर मालिकों से 167 रूपए प्रति क्विंटल पराली खरीद कर कांगथली प्रोजेक्ट तक ले जाते हैं। इन बेलरों के साथ कई लोग लेबर के रूप में जुड़े हुए हैं, जिनकी रोजी रोटी भी उनकी अपनी मेहनत के बल पर चल रही है।

उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य हर धान सत्र में डेढ़ लाख टन पराली खरीदने का है, चूंकि गत वर्ष खरीदी गई पराली उपलब्ध होने के कारण इस बार 1 लाख 20 हजार टन पराली खरीदी जा रही है। एकत्रित की गई पराली से संयंत्र के शुरू होने पर बिजली उत्पादन कर राज्य सरकार के विद्युत विभाग को दी जाएगी ताकि कृषि क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति को और सुलभ किया जा सके। उन्होंने बताया कि कुरूक्षेत्र जिला के छज्जुपुर गांव में भी इस तरह का प्लांट लगाया जा रहा है।

गौरतलब है धान की पराली को खेतों से प्रोजेक्ट तक लाने की प्रक्रिया से सीधे-सीधे हरियाणा सरकार का एक उद्देश्य फलीभूत हो रहा है, जिसमें प्रदेश सरकार किसानों को पराली न जलाकर उसके कुशल प्रबंधन के लिए प्रेरित कर रही है। वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने और पर्यावरण की शुद्धि के लिए यह नितांत आवश्यक है कि प्रदेश के किसान पराली को खेतों में न जलाए और प्रदेश सरकार की कृषि विभाग के माध्यम से दी जा रही राहतों का लाभ उठाते हुए उन पर अमल करें।

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