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हरियाणा-पंजाब के किसान नेताओं में उभरे आपसी मतभेद, चढ़ूनी ने दिल्ली किसान मार्च किया रद‍्द

किसान नेता सरदार बलबीर सिंह राजेवाल ने गुरनाम सिंह चढ़ूनी के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए साफ कर दिया है कि अब चढ़ूनी के साथ में किसान सियासी नेताओं की तरह का व्यवहार करेंगे। उनको काले झंडे दिखाए जाएंगे और उनसे सवाल किए जाएंगे।

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फाइल फोटो

योगेंद्र शर्मा. चंडीगढ़

आखिरकार अब हरियाणा और पंजाब के किसान नेताओं के बीच आपसी मतभेद साफ नजर आने लगे हैं। पंजाब की माटी से संबंध रखने वाले किसान नेता सरदार बलबीर सिंह राजेवाल ने हरियाणा के भाकियू नेता सरदार गुरनाम सिंह चढ़ूनी के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए साफ कर दिया है कि अब चढ़ूनी के साथ में किसान सियासी नेताओं की तरह का व्यवहार करेंगे। उनको काले झंडे दिखाए जाएंगे और उनसे सवाल किए जाएंगे। दूसरी तरफ सरदार गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने दिल्ली तक अपने प्रस्तावित किसान मार्च को रद् करने की घोषणा करते हुए दावा किया है कि कुछ लोग किसानों में फूट डालने का काम कर रहे हैं। लेकिन वे किसान हितों में अपना आंदोलन टालने का ऐलान करते हैं।

वैसे, बुधवार को पंजाब के किसान नेता काफी मुखर और आक्रामक दिखाई दिए। इन नेताओं ने चंडीगढ़ में चढूनी पर जमकर हमला बोला व कहा कि उन्हें काले झंडे दिखाने का फैसला कर लिया गया है। यहां तक की चुनाव की घोषणा से पहले जितने भी लोग रैली आदि करेंगे उसका जमकर विरोध करनेका फैसला ले लिया गया है। दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी ग्रुप) की ओर से 25 नवंबर को अंबाला के गांव मोहडा से टीकरी बार्डर तक की पद यापा काे रद्द करने का फैसला लिया गया है। सरदार गुरनाम सिंह चढूनी ( चढ़ूनी ग्रुप ) ने यह भी कहा कि कुछ किसान संगठन और नेता 24 को मोहडा मंडी से दिल्ली तक की यात्रा बुला रहे हैं। यह एक सोची समझी योजना के तहत किसान आंदोलन को कमजोर करने वाली बात है। चढ़ूनी और उनके साथियों का कहना है कि वे किसान हितों को लेकर चिंतित हैं, इसीलिए अपना मार्च वापस लेते हैं। इस बारे में चढूनी ने हमेशा की तरह से बुधवार को वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है। जिसमें उन्होंने 24 नवंबर की यात्रा बुलाने वाले संगठनों के पदाधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा है कि कुछ लोगों ने आंदोलन को कमजोर करने के लिए संगठन खड़ा किया है।

संयुक्त मोर्चा कमेटी गठन और इसके फैसलों को लेकर भी चढूनी ने सवाल किए हैं। उन्होंने 25 नवंबर को उनकी प्रस्तावित टीकरी सीमा तक की यात्रा को टाल दिया है। अब इस तरह के माहौल में नेट और सोशल मीडिया पर 24 नवंबर की यात्रा का प्रचार किया जा रहा है। चढ़ूनी ने आरोप लगाए हैं कि कुछ लोगों ने इसके लिए झूठ की मुहिम चलाई हुई है। 24 की यात्रा का फैसला संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा की कमेटी में हुआ है, इसके बाद यह फैसला नौ मेंबरी कमेटी में भी लिया गया, नौ मेंबरी कमेटी में चढ़ूनी ग्रुप की ओर से प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस और कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना मौजूद रहे, उनके सामने कोई बात नहीं हुई। चढ़ूनी का दावा है कि संयूक्त किसान मोर्चा की बैठक में वे खुद मौजूद रहे थे। वहां पर इस तरह की कोई चर्चा नहीं हुई थी। इसके बावजूद कुछ वीडियो डालकर दावा कर रहे हैं कि यह फैसला बड़ी कमेटी की बैठक में लिया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आपसी फूट डालकर आंदोलन को कमजोर करने में लगे हुए हैं।

राकेश टिकैत और गुरनाम चढ़ूनी के बीच भी दूरियां

अपनी अनदेखी से आहत चढूनी का कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। कुल मिलाकर राकेश टिकैत और गुरनाम चढ़ूनी के बीच भी दूरियां नजर आने लगी हैं। चढ़ूनी ने आरोप लगाया कि संयुक्त किसान मोर्चा के कुछ नेता उन्हें किनारे करने की साजिश कर रहे हैं, उन्होंने मोर्चा में आपसी फूट और किसी तरह की खींचतान की बात को नकारते कहा कि सभी एकजुट हैं, हम तीन कृषि कानून विरोधी आंदोलन को इसी तरह से चलाए रखेंगे। उधर, पंजाब में 32 किसान संगठनों की ओर से बैठक की बात कही जा रही है। जिसके बाद में बलबीर राजेवाल ने कहा कि गुरनाम चढ़ूनी पंजाब में अपना सियासी एजेंडा लागू करने का काम कर रहे हैं और हम लोगों का सियासत से कोई मतलब नहीं हैं।

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