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परीक्षा में नहीं बैठने दिया तो स्कूल के सामने सड़क पर लेट गया छात्र

सफीदों शहर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और छात्र को अपने साथ थाने ले गए, बाद में उसे परिजनों के हवाले कर दिया।

परीक्षा में नहीं बैठने दिया तो स्कूल के सामने सड़क पर लेट गया छात्र
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बवाल काटने वाले छात्र को गाड़ी में अपने साथ लेकर जाते पुलिस कर्मी।

हरिभूमि न्यूज. जींद

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सफीदों में नौंवी कक्षा की परीक्षा में न बैठने दिए जाने से खफा छात्र ने जमकर बवाल काटा। खफा छात्र स्कूल के बाहर सड़क पर लेट गया। आखिरकार सफीदों शहर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और छात्र को अपने साथ थाने ले गए। बाद में उसे परिजनों के हवाले कर दिया। गांव निम्नाबाद निवासी आजाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सफीदों में नौंवी कक्षा का छात्र है।

शुक्रवार को वह नौंवी कक्षा की हिन्दी विषय की परीक्षा देने विद्यालय में पहुंचा। स्टाफ ने आजाद को यह कहकर परीक्षा में बैठने नहीं दिया कि उसका नाम कट चुका है और विद्यालय के पोर्टल पर भी नहीं है। स्टाफ ने छात्र को बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिससे खफा छात्र विद्यालय के सामने मुख्य मार्ग पर लेट गया और विरोध जताने लगा। जिसके चलते सड़क मार्ग बाधित हो गया। सूचना मिलने पर शहर थाना प्रभारी अब्बास खान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और छात्र को अपने साथ थाने में ले गए। बाद में छात्र को उसके परिजनों के हवाले कर दिया। छात्र का कहना था कि नाम काटे जाने के बारे में उसे बिल्कुल भी मालूम नहीं था। उसे परीक्षा के हक से वंचित किया जा रहा है।

छात्र का नाम मार्च माह में काट दिया था

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के कार्यवाहक प्रभारी कृष्ण ने बताया कि छात्र का नाम मार्च माह में काट दिया गया था और पोर्टल से भी हटा दिया गया था। जिसके पीछे मुख्य वजह छात्र का व्यवहार संतोषजनक न होना रहा। अक्सर लड़ाई झगड़े करता रहता था, जिससे न केवल परिजन बल्कि स्कूल स्टाफ भी परेशान था। नाम कटा होने तथा पोर्टल पर नाम न होने के चलते छात्र को परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया।

वहीं शहर थाना सफीदों प्रभारी अब्बास खान ने बताया कि स्कूल स्टाफ ने छात्र को नाम कटा होने तथा पोर्टल पर नाम न होने के बारे में बताया था। साथ ही परीक्षा से संबंधित नियमों के बारे में अवगत करवाया गया था। बावजूद इसके छात्र नहीं माना और वह सड़क पर लेट गया। छात्र को समझा बुझाकर परिजनों के हवाले कर दिया गया है।




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