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कोरोना से बेखौफ होकर Somvati Amavasya पर श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान

चैत्र मास की सोमवती अमावस्या को लेकर सोमवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का पांडू पिंडारा तीर्थ पर पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया था। जो दोपहर बाद तक चलता रहा।

कोरोना से बेखौफ होकर Somvati Amavasya पर श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान
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 पांडू पिंडारा तीर्थ पर पहुंचे श्रद्धालु।  

हरिभूमि न्यूज. जींद

चैत्र माह की सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने कोरोना संक्रमण से बेखौफ होकर तीर्थ में स्नान किया। हजारों की संख्या में दूर दराज के इलाकों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पिंडदान कर पिर्त तर्पण किया। रोक के बावजूद भी तीर्थ परिसर में दुकानें लगी, जहां पर श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी भी की।

चैत्र मास की सोमवती अमावस्या को लेकर सोमवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का पांडू पिंडारा तीर्थ पर पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया था। जो दोपहर बाद तक चलता रहा। श्रद्धालुओं ने तीर्थ में स्नान किया और पितरों की शांति के लिए पिंडदान भी किया। हालांकि तीर्थ पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल को तैनात किया गया था। कोरोना संक्रमण के मामलों में इजाफा होने के बाद भी खूब श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचे।

पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं।

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