Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Devi Lal Birth Anniversary : जब देवीलाल ने कहा था ' मुझे ताऊ ही रहने दो' ठूकरा दिया प्रधानमंत्री का पद

एक दिसंबर 1989 को चुनाव के बाद नतीजे आने के बाद संयुक्त मोर्चा संसदीय दल की बैठक में चौधरी देवीलाल को संसदीय दल का नेता मान लिया गया था, परंतु उन्होंने कहा कि मुझे सब लोग ताऊ कहते हैं और मुझे ताऊ बने रहना ही पसंद है और मैं ये पद विश्वनाथ प्रताप को सौंपता हूं।

Devi Lal Birth Anniversary : जब देवीलाल ने कहा था  मुझे ताऊ ही रहने दो ठूकरा दिया प्रधानमंत्री का पद
X

Devi Lal Birth Anniversary

हरियाणा के जनक कहे जाने वाले पूर्व उप प्रधानमंत्री स्व. ताऊ देवीलाल का आज 108वां जन्मदिवस है। चौधरी देवी लाल का जन्म 25 सितम्बर 1914 को हुआ था और 6 अप्रैल 2001 को मौत हुई थी। जननायक देवीलाल को किसानों के मसीहा, हरियाणा के जन्मदाता, महान स्वतंत्रता सेनानी, राजनीति के भीष्म-पितामह और करोड़ों भारतीयों के जननायक के रूप में ख्याति प्राप्त है। वे ताऊ देवी लाल के नाम से प्रसिद्ध हैं।

देवीलाल को बहुमत से संसदीय दल का नेता मान लिए जाने के बाद भी उन्होंने प्रधानमंत्री का पद ठूकरा दिया था। एक दिसंबर 1989 को चुनाव के बाद नतीजे आने के बाद संयुक्त मोर्चा संसदीय दल की बैठक में चौधरी देवीलाल को संसदीय दल का नेता मान लिया गया था, परंतु उन्होंने कहा कि मुझे सब लोग ताऊ कहते हैं और मुझे ताऊ बने रहना ही पसंद है और मैं ये पद विश्वनाथ प्रताप को सौंपता हूं। ताऊ देवी लाल 19 अक्टूबर 1989 से 21 जून 1991 तक देश के उप-प्रधानमंत्री रहे और वे दो बार 21 जून 1977 से 28 जून 1979 तक तथा 17 जुलाई 1987 से 2 दिसम्बर 1989 तक हरियाणा के सीएम भी रहे। उप प्रधानमंत्री बनने के बाद का समय देवी लाल के लिए खराब ही रहा। सन 1991, 1996, तथा 1998 में हुए लोकसभा चुनावों मेंं चौधरी देवी लाल रोहतक सीट से खड़े हुए औरभूपेंद्र सिंह हुड्डा से तीनों चुनाव में परास्त हुए। उनके पुत्र ओमप्रकाश चौटाला ने 1998 में उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनवा दिया और राज्यसभा का सदस्य रहते हुए ही 2001 में उनकी मृत्यु हो गई थी।

लागू की थीं कई योजनाएं

देवीलाल ने हरियाणा में काम के बदले अनाज, जच्चा-बच्चा योजना, वृद्धावस्था पेंशन जैसी दूरगामी नीतियों को लागू किया था। उनका ग्रामीण जनता से हमेशा संपर्क बना रहा। अचानक किसी गांव में पहुंचकर भोजन करना, हुक्का पीते हुए ठेठ गंवई अंदाज में लोगों से बातचीत ने ही उन्हें जननायक का दर्जा दिलाया था। चौधरी देवीलाल भूमिपुत्र, उपेक्षित वर्ग, किसानों एवं श्रमिकों के मसीहा थे। देवीलाल हरियाणा की जनता के हृदय सम्राट, बेताज बादशाह, जननायक, राजनीतिक योद्धा, हरियाणा की हीरे, किसानों के हर दिल अजीज, भारत के रत्न, आधुनिक भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह, युगपुरुष, लोहपुरुष, संघर्ष के प्रतीक एवं त्यागमूर्ति थे। चौधरी देवीलाल को जनता सम्मान पूर्वक ताऊ के नाम से संबोधित करती है। वह हरियाणा के निर्माताओं में अग्रणी थे। राजनीति में वह छोटे से प्रदेश हरियाणा के मुख्यमंत्री से भारत के उप प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हुए।

फारसी, उर्दू, हिंदी व अंग्रेजी का व्यवहारिक ज्ञान था

ताऊ देवीलाल को फारसी, उर्दू, हिंदी व अंग्रेजी का व्यवहारिक ज्ञान था। उनकी कुश्ती, घुड़सवारी एवं तैराकी में विशेष रूचि थी। खेल में रुचि होने के कारण इनमें सहिष्णुता, साहस, संघर्ष एवं नेतृत्व की भावना विकसित हुई और कालांतर में राजनीति को खेल मानने के कारण उनमें नेतृत्व की अनोखी प्रतिभा, निपुणता एवं संघर्ष करने की अभूतपूर्व एवं अतुलनीय गुणवत्ता विद्यमान थी। देवीलाल ने स्वयं इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि खेलों के कारण ही उनको लोगों की अगुवाई करने की प्रेरणा मिली और गांधीवादी एवं साम्यवादी तथा क्रांतिकारी आंदोलन से प्रभावित होकर चौधरी देवीलाल बाल्यकाल में ही संघर्ष की राह पर चल पड़े, जो आगे चलकर उनके संघर्षशील राजनीतिक सफर का मार्गदर्शक बनी।

राजनीतिक सफर

दिसंबर 1929 में देवीलाल ने कांग्रेस पार्टी के लाहौर अधिवेशन में स्वयं सेवक के रूप में भाग लिया। जब महात्मा गांधी के नेतृत्व में 12 मार्च 1930 को ऐतिहासिक दांडी यात्र प्रारंभ हुई और नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार को चुनौती दी गई तो देवीलाल को बगावत के कारण 8 अक्टूबर 1930 को सेंट्रल जेल हिसार में बंद किया गया तथा 4 जनवरी 1931 को बोरस्टम जेल, लाहौर जो अब पाकिस्तान में है, में भेजा गया तथा वह लगभग 10 महीने जेल में रहे। युवा देवीलाल की यह प्रथम जेल यात्र उनके राजनीतिक जीवन का मील का पत्थर एवं प्रथम महान कदम था। देवीलाल के मन, विचारों एवं चिंतन पर भारत माता के महान सपूतों की कुर्बानी का अमिट प्रभाव पड़ा और वह पक्के राष्ट्रवादी एवं विद्रोही बन गए। यद्यपि देवीलाल क्रांतिकारी चिंतन से प्रभावित थे, परंतु उन्होंने राजनीतिक संघर्ष में गांधीवादी परिपेक्ष का परित्याग नहीं किया।

सन् 1946–47 में भारत में सांप्रदायिकता की भावना एवं सांप्रदायिक हिंसा अपनी चरम सीमा पर थी। ऐसी स्थिति में देवीलाल राष्ट्रीय नेतृत्व एवं भारत के सर्वश्रेष्ठ एवं महान राष्ट्रीय नेताओं जवाहर लाल नेहरू तथा महात्मा गांधी की भांति एक चट्टान की तरह अडिग एवं सु–ढ़ होकर पीड़ित लोगों की सेवा में लगे रहे और सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ने से रोका तथा मुसलमानों को पाकिस्तान जाने और हिंदुओं तथा सिखों को भारत में आने एवं शरणार्थी शिविरों को स्थापित करने में सहायता की। यही कारण है कि सिख धर्म के अनुयायियों में देवीलाल का नाम बड़े सम्मान एवं गर्व के साथ लिया जाता है।

500 कार्यकर्ताओं के साथ हुए थे गिरफ्तार

जमीदारी व्यवस्था के विरुद्ध अपने गांव चौटाला में मुजारा आंदोलन प्रारंभ किया। देवीलाल को 500 कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। जनता के दबाव के कारण पंजाब के मुख्यमंत्री गोपीचंद भार्गव की सरकार को मुजारा अधिनियम में संशोधन करना पड़ा तथा देवीलाल को सितंबर 1950 में जेल से रिहा करना पड़ा। परिणाम स्वरूप देवीलाल किसान नेता के रूप में भारतीय राजनीतिक पटल पर निरंतर अग्रसर होते चले गए। पंजाब विधानसभा में मुजारों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करके सन 1953 में मुजारा अधिनियम बनवाने में सफलता प्राप्त की।

1962 के उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी के टिकट वितरण में भेदभाव पूर्ण एवं अन्यायपूर्ण नीति के कारण कांग्रेस पार्टी को छोड़कर हरियाणा लोक समिति का निर्माण किया और सन् 1962 के निर्वाचन में फतेहाबाद निर्वाचन क्षेत्र से विजय प्राप्त की और विधायक बने तत्पश्चात् हरियाणा संघर्ष समिति के हरियाणा राज्य की स्थापना के लिए आंदोलन चलाया। हरियाणा राज्य की स्थापना के लिए आंदोलन में देवीलाल की अग्रणी भूमिका रही। उनके अथक प्रयासों एवं जनसंपर्क के कारण फरवरी 1987 में कांग्रेस पार्टी को हरियाणा विधानसभा की 81 सीटों में से 48 सीटें मिली। देवीलाल त्यागमूर्ति के रूप में जाति व्यवस्था की सीमाओं को लांघ कर सोचते थे। उन्होंने कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में संसद सदस्य दलबीर सिंह दलित वर्ग के नाम का प्रस्ताव रखा, परंतु कांग्रेस पार्टी की हाईकमान के द्वारा भगवत दयाल शर्मा को 10 मार्च 1977 को मुख्यमंत्री बनाया गया। आपातकाल के दौरान भी उनको 19 मास तक नजरबंद रखा गया। आपातकाल की समाप्ती के बाद सन् 1977 में देवीलाल फिर जनता के बीच आए और सारे भारत का भ्रमण करते हुए विभिन्न राजनैतिक पार्टियों को एक मंच पर इकठा करके तत्कालीन केंद्रीय सरकार की किसान व मजदूर विरोधी नीतियों का पर्दाफास करके केंद्रीय स्तर पर जनता पार्टी की सरकार का गठन करवाने में कामयाब हुए। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा तथा बिहार में किसान हितैषी मुख्यमंत्रियों को स्थापित करवाया।

कई योजनाओं का किया शुभारंभ

एक सफल एवं सुयोग्य मुख्यमंत्री एवं उप प्रधानमंत्री के रूप में देवीलाल ने जनता विशेष रूप से किसानों, श्रमिकों, दलितों तथा उपेक्षित के लिए असंख्य जनहित योजनाओं का क्रियान्वयन किया। इन योजनाओं एवं कार्यक्रमों में किसानों एवं श्रमिकों को बैंकों से मिलने वाले ऋण पर ब्याज कम करना, मैचिंग ग्रांट, काम के बदले अनाज बेरोजगारी भत्ता, वृद्धावस्था पर सम्मान पेंशन, स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन में वृद्धि तथा सम्मान पत्र देकर सम्मानित करना, विकलांगों एवं विधवाओं की पेंशन में वृद्धि विकलांगों व पुलिसकर्मियों के लिए खिलाड़ी कोटे में 3 प्रतिषत आरक्षण, बाढ़ से बचाव के लिए रिंग बांधों के निर्माण पर बल तथा सस्ती दरों पर बीज खाद व दवाइयां, फसलों के उचित दामों का निर्धारण, किसानों को सस्ते दरों एवं प्राथमिक प्राथमिकता के आधार पर बिजली की आपूर्ति, विद्यार्थियों के लिए नाम मात्र किराए पर बस सुविधा, अनुसूचित जाति तथा पिछड़े वगोंर् का कर्जा माफ करना, गांव में चौपालों का नवनिर्माण, हरिजन महिलाओं की सहायता, मुक्त द्वार प्रशासन, खानाबदोशों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए उन्हें स्कूलों में उपस्थित होने पर प्रतिदिन प्रति बच्चा एक रूपये प्रोत्साहन देने की योजना इत्यादि मुख्य हैं।

Next Story