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रणजीत हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गद्दीनशीन शाह सतनाम सिंह के नाती को भी राम रहीम के बराबर सजा

सीबीआई द्वारा पेश की गई चार्जशीट के मुताबिक डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह, डेरा के मैनेजर इंद्रसेन, कृष्ण लाल व मैनजमेंट कमेटी के सदस्य अवतार सिंह ने रणजीत सिंह की हत्या करवाने की योजना बनाई थी।

रणजीत हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गद्दीनशीन शाह सतनाम सिंह के नाती को भी राम रहीम के बराबर सजा
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राम रहीम और अवतार सिंह

हरिभूमि न्यूज. सिरसा

पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने आखिरकार डेरा सच्चा सौदा के पूर्व मैनेजर रणजीत सिंह की निर्मम हत्या के मामले में फैसला सुना दिया है। अदालत ने गुरमीत सिंह सहित पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष अदालत ने रंजीत सिंह हत्‍याकांड में डेरा सच्‍चा सौदा के गुरमीत सिंह सहित पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई और गुरमीत सिंह पर 31 लाख का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की 50 फीसदी राशि अभी अदा करनी होगी। इसके अलावा बाकी चार दोषियों पर 50-50 हजार का जुर्माना लगाया है। गुरमीत पर लगाए जुर्माने की आधी राशि पीड़ित परिवार को दिए जाने का आदेश भी दिया गया है।

8 अक्टूबर को विशेष अदालत पंचकूला सीबीआई की ओर से जसबीर सिंह, सबदिल सिंह और कृष्ण लाल को धारा 302 के साथ 120-बी के तहत दोषी ठहराया था। गुरमीत राम रहीम सिंह, अवतार सिंह, जसबीर सिंह, सबदिल सिंह और कृष्ण लाल को धारा 120बी, 302 एवं 506 के साथ पठित धारा के तहत दोषी ठहराया था। सबदिल सिंह को आर्म्‍स एक्ट 1959 की धारा 27 के तहत अपराध के तहत दोषी करार दिया था। जबकि आरोपित जसबीर सिंह पर आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 25/27 को हटा दिया था। बता दें कि लकड़वाली निवासी अवतार सिंह डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गद्दीनशीन शाह सतनाम सिंह के नाती हैं। 19 साल बाद मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश डाक्टर. सुशील गर्ग द्वारा 12 अक्टूबर को सजा सुनाई जानी थी, लेकिन सजा पर सुनवाई पूरी न होने के कारण मामले को 18 अक्टूबर के लिए टाल दिया था।

यह है पूरा मामला

सीबीआई द्वारा पेश की गई चार्जशीट के मुताबिक डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह, डेरा के मैनेजर इंद्रसेन, कृष्ण लाल व मैनजमेंट कमेटी के सदस्य अवतार सिंह ने रणजीत सिंह की हत्या करवाने की योजना बनाई। इसके लिए डेरा प्रमुख के अंगरक्षक एवं पंजाब पुलिस के हवालदार शबदिल और उत्तरप्रदेश के शूटर रणजीत सिंह को 16 जून 2002 को रणजीत सिंह को मारने के आदेश दिए गए।

मेरा भाई निर्दोष: लाभ सिंह

डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गद्दीनशीन संत शाह सतनाम सिंह के दोहते लाभसिंह निवासी लकड़ांवाली ने सीबीआई कोर्ट द्वारा आज सुनाए गए फैसले को अगली अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है। लाभ सिंह ने कहा कि मेरा भाई अवतार सिंह इस मामले में निर्दोषहै। वे सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट जाएंगे और उन्हें उम्मीद है कि वहां उनके भाई को न्याय मिलेगा।

19 साल बाद आया फैसला

कुरुक्षेत्र के खानपुर कोलिया निवासी रणजीत सिंह डेरा सच्चा सौदा प्रबंधक कमेटी का सदस्य था। उसकी बहन डेरा में साध्वी थी, लेकिन किसी करणों के चलते रणजीत सिंह ने डेरा छोड़ दिया। इसी दौरान डेरा प्रमुख के खिलाफ एक गुमनाम चिट्ठी आई, जिसको सिरसा से प्रकाशित सांध्य दैनिक पूरा सच में प्रकाशित की गई। इस चिट्ठी के प्रकाशन के बाद डेरा प्रबंधन का समाचार पत्र के संपादक रामचंद्र छत्रपति के साथ भी विवाद हो गया और आखिर में रामचंद्र छत्रपति की हत्या कर दी गई, जिसमें डेरा प्रमुख को सजा हो चुकी है। बताया जाता है कि इस गुमनाम चिट्ठी का शक रणजीत सिंह पर हुआ। डेरा की ओर से रणजीत सिंह को कई बार बुलाया गया, लेकिन वह नहीं आया। जुलाई 2002 में रणजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आज करीब 19 साल बाद रणजीत सिंह हत्याकांड में डेरा प्रमुख को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है।

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