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अंबाला में बेकाबू होने लगा डेंगू , मरीजों का आंकड़ा 292 पर पहुंचा

स्वास्थ्य विभाग की लैब में रोज 400-500 टेस्ट किए जा रहे हैं। बुखार के मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अब लैब पर भी दबाव बढ़ गया है। सीएमओ डॉक्टर कुलदीप सिंह पिछले दिनों हुई बरसात को इसके लिए सीधेतौर पर जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

अंबाला में बेकाबू होने लगा डेंगू , मरीजों का आंकड़ा 292 पर पहुंचा
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 बुखार से पीड़ित मरीज नागरिक अस्पताल में दाखिल ।

हरिभूमि न्यूज. अंबाला

जिले में डेंगू बेकाबू हो रहा है। सरकारी दस्तावेजों में अब तक 292 मरीज दर्ज हो चुके हैं। शुक्रवार को 24 नए मरीज सामने आए हैं। प्राइवेट अस्पतालों में दाखिल मरीज इस आंकड़े में शामिल नहीं है। ऐसे में डेंगू के मरीजों का आंकड़ा 292 से कहीं ज्यादा बताया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लैब में रोज 400-500 टेस्ट किए जा रहे हैं। बुखार के मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अब लैब पर भी दबाव बढ़ गया है। सीएमओ डॉक्टर कुलदीप सिंह पिछले दिनों हुई बरसात को इसके लिए सीधेतौर पर जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

पांच साल पहले यानि 2016 में भी जिले में डेंगू बेकाबू हुआ था। तब भी ऑफ सीजन में हुई बरसात को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस बार भी सितंबर व अक्तूबर में अचानक हुई बरसात को डेंगू के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो ऑफ सीजन में हुई बरसात की वजह से सड़कों व घरों के आसपास हुई गड्ढों में पानी जमा हो गया। इसी वजह से एडीज मच्छर को पनपने का मौका मिल गया। साफ पानी में पैदा हो रहे मच्छर ही डेंगू को विस्तार दे रहे हैं। शहरी क्षेत्रों की बजाय गांवों में डेंगू प्रभावित लोगों की संख्या सबसे ज्यादा हैं। मगर ये लोग सरकारी अस्पतालों की बजाय प्राइवेट या फिर झोलाछाप चिकित्सकों से ही उपचार करवा रहे हैं। नारायणगढ़ व मुलाना एरिया से लगातार डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। इन मरीजों को नागरिक अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। स्थिति ज्यादा न बिगड़े इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों के साथ पीएससी व सीएससी में भी डेंगू वार्ड बनाए गए हैं।

पैरासिटामोल का ही करें इस्तेमाल

तेज बुखार होने पर चिकित्सक हल्दी डाइट के साथ केवल पैरासिटामोल दवाई लेने की ही सलाह दे रहे हैं। सरकारी चिकित्सकों की मानें तो पैरासिटामोल की बजाय दूसरी दवाई लेने से मरीज की सेहत को नुकसान होता है। उसे खून बहने की शिकायत हो सकती है। ऐसे में प्लेटलेट्स कम होने शुरू हो जाते हैं। मरीजों को प्लेटलेट्स तभी चढ़ाए जाने की नौबत आएगी जब ज्यादा खून बहेगा। क्योंकि दूसरी दवाओं के इस्तेमाल से मरीज की स्थिति गंभीर बनती है। कुछ प्राइवेट अस्पताल संचालक निजी फायदे के लिए मरीजों को नियम तोड़कर प्लेटलेट्स चढ़ा रहे हैं। ऐसे चिकित्सकों पर विभागीय अधिकारियों की नजर है।

घबराने की जरुरत नहीं स्थिति कंट्रोल में

सीएमओ डॉक्टर कुलदीप सिंह ने बताया कि अभी तक 290 से ज्यादा डेंगू के मरीज चिह्नित हो चुके हैं। ज्यादातर मरीजों की स्थिति बिल्कुल ठीक है। उन्होंने बताया कि सितंबर व अक्टूबर महीने में अचानक हुई बेमौसमी बरसात की वजह से डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। नवंबर महीने में भी डेंगू के मामले सामने आ सकते हैं। इसके लिए हमारी ओर से पूरी तैयारी है। तेज बुखार होने पर किसी को घबराने की जरुरत नहीं है। हेल्थी डाइट के साथ मरीज निरंतर पैरासिटामोल का इस्तेमाल करता रहे। तबीयत ज्यादा खराब हो तो डॉक्टर की सलाह ले सकता है। डेंगू के उपचार में किसी दूसरी दवा के इस्तेमाल से सेहत को नुकसान हो सकता है। हम हर मरीज को पैरासिटामोल दवा लेने की सलाह दे रहे हैं। एडीज मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी के साथ मच्छर मार दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।


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